कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के राज्य की सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात वन विभाग और मध्यप्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ संरक्षित क्षेत्र के क्षेत्रीय वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से वन्य प्राणी सप्ताह के तहत इन दोनों राज्यों के सीमावर्ती वनांचल क्षेत्रों का भ्रमण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण में पदस्थ अधीक्षक, परिक्षेत्र अधिकारी, परिक्षेत्र सहायक और गेम गार्ड्स के साथ छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से लगे हुए मध्य प्रदेश राज्य के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ संरक्षित क्षेत्र के क्षेत्रीय वन अमला ने मालूम झोला, मठिया डोंगरी, नंदनीटोला, कुमान, सिलयारी, बंदूक कुंदा, पटवा ग्रामों और इन ग्रामों से सटे हुए वन क्षेत्रों का लगभग 20 किलोमीटर पैदल गश्त करके भ्रमण किया। रिहायशी इलाकों, खेतों तथा वन क्षेत्रों में विगत कुछ माह में छत्तीसगढ़ राज्य के अलग-अलग जिलों में विभिन्न प्रकरण प्रकाश में आए हैं कि मानव वन्य प्राणी द्वंद के चलते स्थानीय ग्रामीणों और शिकारियों द्वारा वन्य प्राणियों का शिकार करंट लगाकर करने के लिए विद्युत प्रवाहित तार बिछाए गए थे। वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, अतिक्रमण, अवैध उत्खनन और बहुमूल्य वनोपज तथा लघु वनोपज के परिवहन की घटनाएं भी घटित होती रहती हैं। पैदल गश्त करने से वन क्षेत्र में पदस्थ स्थानीय वनकर्मी को अपने क्षेत्र के बारे में, उसकी सुरक्षा, भौगोलिक स्थिति और वन प्रबंधन संबंधित बहुत सी जानकारियां प्रथम दृष्टि संज्ञान में आती है, जिनका उपयोग वह वन संरक्षण, वन प्रबंधन और वन विकास में कर सकते हैं। उसी प्रकार वनकर्मी के अधीनस्थ वन क्षेत्र में स्थित गांव के ग्रामीणों से भी उनका सौहार्दपूर्ण संपर्क स्थापित होता है जिससे संयुक्त वन प्रबंधन और वनों की सुरक्षा में इन ग्रामीणों का सहयोग और विभिन्न वानिकी कार्यों के संपादन में इनको बतौर मजदूर, मेट, प्रबंधक, आदि जिम्मेदारियां देकर न सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है अपितु, उनको वनों, जैवविविधता, वन्य प्राणी, पर्यावरण, इत्यादि संबंधित जागरूकता भी प्रत्यक्ष सहभागिता से दी जा सकती है।
दोनों राज्यों की संयुक्त गश्त दल आगे भी जारी रहेगी- डीएफओ
कबीरधाम जिले के वनमंडलाधिकारी दिलराज प्रभाकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश राज्य के वन कर्मियों की संयुक्त पैदल गश्त की यह पहल आगे भी जारी रहेगी, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के वन प्रबंधन और वन विकास में न सिर्फ वन विभाग के अमले की भूमिका होगी बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की भी सक्रिय सहभागिता से वनों को सुरक्षित और संरक्षित रखने में शासन और प्रशासन को सहयोग मिलेगा।
भोरमदेव अभ्यारण में है तेंदू का सबसे बड़ा वृक्ष
भोरमदेव अभ्यारण में मटिया डोंगरी ग्राम के पास जिला कबीरधाम का सबसे ऊंचा तेंदू वृक्ष मौजूद है। इस वृक्ष की छाती गोलाई 10.54 फीट है तथा इस वृक्ष की ऊंचाई जमीन की सतह से लगभग 94 फीट है। तेंदू एवोनेसी कुल का है तथा तेंदू का वनस्पतिक नाम डायोस्पायरस मेलनोजाइलोन है।

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