नई दिल्ली। हाथरस केस में अब परिजनों ने पीड़िता के अस्थी विजर्सन से इनकार कर दिया है। शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजनों ने अस्थियों का संग्रह तो किया, लेकिन विजर्सन से साफ मना कर दिया। उनका कहना है कि न्याय मिलने पर ही अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।

मंगलवार रात प्रशासन व पुलिस ने पीड़िता के शव का दाह संस्कार कराया था। मृतक के परिजनों ने बिना अनुमति के शव का अंतिम संस्कार करने का आरोप लगाया था। परिजनों का कहना था कि अंतिम संस्कार से पहले प्रशासन ने उन्हें बिटिया का चेहरा तक नहीं दिखाया। यह शव किसका है, उन्हें नहीं बताया। जब हमें यही नहीं पता कि शव किसका है तो अस्थियां क्यों चुने। उनका कहना था कि यह तो पुलिस ही बता सकती है कि किसका शव उन्होंने तेल डालकर जलाया है। इस पर प्रशासन ने परिजनों को समझाया, लेकिन परिजनों ने शव को बिटिया का ही मानने से इंकार कर दिया था।

शनिवार को अपर प्रमुख गृह सचिव अवनीश अवस्थी और डीजीपी हितेश अवस्थी के पीड़िता के परिजनों से घटना के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों के समझाने बुझाने पर शाम को परिजन अस्थियां लेने के लिए पहुंचे। जहां गम और गुस्से के बीच पीड़िता के भाई ने अस्थियों का संचय किया। इसी बीच उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जबतक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तबतक वह अस्थियों का गंगाघाट में विसर्जन नहीं करेंगे। ऐसे में चार दिन बाद भी पीड़िता की चिता की राख में मौजूद अस्थियों को गंगा घाट का इंतजार है। जिससे की उन्हें मुक्ति मिल सके। पीड़िता के परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर उनकी निगरानी करने का भी आरोप लगाया था। परिजन यह भी कहते रहे कि उन्हें क्या पता प्रशासन ने किसका शव जला दिया।
पंकज शास्त्री, ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि मध्य रात्रि 12 से लेकर ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे तक शव का दाह संस्कार करना वर्जित मना गया है। तड़के चार बजे तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है। दाह संस्कार के तीसरे या चौथे दिन अस्थि संचय करने का विधान है। अस्थियां गंगाघाट पर विसर्जन की जानी चाहिए। जबतक गंगा में अस्थियां विसर्जन से मृतक आत्मा को मुक्ति प्राप्त होती है।

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