नई दिल्ली।

लॉकडाउन के महीनों बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों ने कई शर्तों के साथ सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं। इस बीच कई देशों ने उच्च जोखिम वाले देशों से आने वाली उड़ानों को रोकने के अपने अधिकारों का फिर से प्रयोग किया। इस दौरान स्थानीय एयरलाइनों के फायदे के लिए विदेशी उड़ानों पर प्रतिबंध भी लगाया गया।

वंदे भारत मिशन और एयर बबल के हिस्से के रूप में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के बाद से अब तक कई देश भारत की उड़ानों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि बाद में इनमें से कुछ मुद्दों को सुलझा लिया गया। यहां ऐसे देशों की एक सूची दी गई है और जिसमें लिखा है कि उन्होंने आपत्ति क्यों जताई।

अमेरिका: अमेरिकी प्रशासन ने मई में वंदे भारत मिशन की उड़ानों पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि भारत सरकार अमेरिकी एयरलाइनों की ऐसी ही उड़ानों के संचालन पर रोक लगाकर उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रही है। इस मुद्दे को भारत और अमेरिका ने एयर बबल स्थापित कर सुलझा लिया।

यूएई: संयुक्त अरब अमीरात ने ऐसी ही चिंता जताई कि भारत संयुक्त अरब अमीरात की किसी भी उड़ान की अनुमति नहीं दे रहा। जून में यूएई के अधिकारियों ने कहा था कि यदि एयर इंडिया की उड़ानें यूएई के नागरिकों को ले जा रही हैं, तो उन्हें विशेष अनुमति की भी आवश्यकता होगी। इसके बाद यूएई के साथ एयर बबल की स्थापना की गई।

दुबई: दुबई ने कोविड-19 की चिंता के चलते एयर इंडिया की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब इसने अधिकारियों को चार कोविड-19 परीक्षण केंद्रों को ब्लैकलिस्ट करने के लिए कहा है जब वे यात्रियों की फ्लाइट में सवार होने की अनुमति देने से पहले परीक्षण रिपोर्ट की जांच करते हैं।

हांगकांग: अगस्त और सितंबर में दो बार पखवाड़े की अवधि के लिए हांगकांग ने वंदे भारत की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि यात्रियों को कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया था।

जर्मनी: वर्तमान में भारत और जर्मनी के बीच कोई उड़ान परिचालन नहीं है। हालांकि दोनों देशों के बीच एक एयर बबल समझौता है। इस बात पर चर्चा चल रही है कि जर्मनी भारतीय वाहकों को उतनी उड़ान भरने की अनुमति नहीं दे रहा है, जितनी कि लुफ्थांसा को मिल रही है।

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