रायपुर। राज्य में खरीफ के फसलों की सुरक्षा और कीट व्याधियों की रोकथाम हेतु कृषि विभाग द्वारा किसानों को आवश्यक सलाह दी गई है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार धान की फसल पुष्पन अवस्था में है। यदि उनमें 50 प्रतिशत पुष्पन हो चुका है, तो नत्रजन की तृतीय किस्त का छिड़काव करें। पोटाश की सिफारिश मात्रा का 25 प्रतिशत भाग फूल निकलने की अवस्था पर टाप ड्रेसिंग करने से धान के दानों की संख्या एवं वजन में वृद्धि देखी गई है। किसानों को सलाह है कि वे धान की कुल जल आवश्यकता का 50 प्रतिशत गर्भवस्था से दूध भरने तक लगता है। अत: फूल आने एवं दाने में दूध भरने की अवस्था में पानी की कमी से उपज में सर्वाधिक नुकसान होता है। इसलिए किसान भाईयों को सलाह है कि खेत में 5 से.मी. पानी भरकर रखें। कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि धान फसल पर पीला तना छेदक कीट के वयस्क दिखाई देने पर फसल का निरीक्षण कर तना छेदक के अंडा समूह को एकत्र कर नष्ट कर देवें साथ ही डेड हार्ट (सूखी पत्ती) को खीचकर निकाल देवें। तना छेदक की एक तितिली-मोथ प्रति वर्ग मीटर में होने पर फिपरोनिल 5 एस.सी. एक लीटर प्रति हेक्टेयर के दर से छिड़काव करें। किसान अपनी खेत की सतत निगरानी करें मौसम साफ रहने एवं वर्षा न होने पर कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें। कहीं-कहीं पर माहूं कीट का प्रकोप शुरू हो गया हैं, धान फसल की सतत निगरानी करें एवं कीटों की संख्या 10-15 प्रति पौधा हो जाने पर शुरूवात में ब्युपरोफेजिन 800 मि.ली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। तत्पश्चात 15 दिन बाद अगर कीट का प्रकोप बढ़ता दिखई दे तो डाइनेटोफ्युरान 200 ग्रा.प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर अपरान्ह काल में फसल के आधोरीय भागों पर छिडकाव करें। सिंथेटिक पाईराथ्राईड वर्ग के कीटनाशक जैसे साइपरमेंथिरिन व डेल्टामेंथिरिन दवाओं का उपयोग माहूं के प्रकोप को बढ़ा सकता है अत: इनका उपयोग, मांहू नियंत्रण में ना करें। किसान भाईयों अपनी खेत की सतत निगरानी करें। मौसम साफ रहने एवं वर्षा न होने पर कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें। कहीं-कहीं पर धान में पेनिकल माईट का प्रकोप देखने में आया हैं जिसकी पहचान पोंचे व बदरंग दाने व तने पर भूरापन देखकर किया जा सकता हैं। इसके निदान हेतु प्रोपिकोनाजोल 2 मि.ली.$प्रोफेनोफास 2 मि.ली.प्रति लीटर पानी में घोलकर 500 लीटर घोल प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। किसान भाईयों अपनी खेत की सतत निगरानी करें। मौसम साफ रहने एवं वर्षा न होने पर कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें। कृषि विभाग के अधिकारियों ने सलाह दी है कि धान की फसल में रोग के प्रारंभिक अवस्था में निचली पत्ती पर हल्के बैगनी रंग के धब्बे पड़ते है, जो धीरे-धीरे बढ़कर ऑख/नाव के सामान बीच में चौड़े एवं किनारों में सकरे हो जाते है इन धब्बों के बीच का रंग हल्के भूरे रंग का होता है। इसके नियंत्रण के लिए टेबूकोनाजोल 750 मि.ली.प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। आने वाले दिनों में रात्रि का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस व आर्द्रता 85 प्रतिशत होने की संभावना है। अत: झुलसा रोग के प्रकोप होने की संभावना है। किसान भाई खेतों की सतत निगरानी करें व लक्ष्ण दिखने पर उपर्युक्त रोकथाम उपाय करें। धान के खेत में पानी की सतह के ऊपर पौधों के तनों पर यदि मटमैले रंग के बड़े-बड़े धब्बे दिख रहे हों तथा यह धब्बे बैगनी रंग के किनारे से घिरे हो, जिसे शीथ ब्लाइट रोग कहते हैं। यह रोग आने पर हेक्साकोनाजोल, फफंूदनाशक दवा ( 1 मि.ली./ली.पानी) का छिड़काव रोगग्रस्त भागों पर करें। आवश्यकता पड़ऩे पर यह छिड़काव 12-15 दिन बाद पुन: दोहराया जा सकात है। आने वाले दिनों में तापमान 32 डिग्री सेलसियस व आर्द्रता 85 प्रतिशत होने की संभावना है। अत: शीथ ब्लाइट रोग के प्रकोप होने की संभावना है। किसान भाई खेतों की सतत निगरानी करें व लक्षण दिखने पर उपर्युक्त रोकथाम उपाय करें।

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