आसान
नही होता सत्ता के कठोर
अपरिहार्य चलन को ढकेल कर, ममता
को बरकरार रखते हुए सामाजिक
रुढियों को तोड पाना। बात जब
सदियों के काबिज धर्म और
पारिवारिवारिक रस्मों और दौर
को बदलने की हो तो अच्छे से – 29/05/2025
आसान
नही होता सत्ता के कठोर
अपरिहार्य चलन को ढकेल कर, ममता
को बरकरार रखते हुए सामाजिक
रुढियों को तोड पाना। बात जब
सदियों के काबिज धर्म और
पारिवारिवारिक रस्मों और दौर
को बदलने की हो तो अच्छे से – 29/05/2025
आसान
नही होता सत्ता के कठोर
अपरिहार्य चलन को ढकेल कर, ममता
को बरकरार रखते हुए सामाजिक
रुढियों को तोड पाना। बात जब
सदियों के काबिज धर्म और
पारिवारिवारिक रस्मों और दौर
को बदलने की हो तो अच्छे से – 29/05/2025
