रायपुर। छत्तीसगढ़ में देश के अन्य राज्यों जैसे केरल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली एवं यूरोप की तरह कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर न आए, इसके लिए प्रदेश के सभी लोगों को एकजुट होकर संक्रमण से बचना होगा और सरकार के निर्देशों का पालन करना होगा। यूनीसेफ के छत्तीसगढ़ हेड जॉब जचारिया ने भी लोगों से अपील की है कि संक्रमण से बचने के लिए भीड़ वाली जगहों में न जाएं, 1 मीटर की दूरी रखें, सही तरीके से मास्क पहनें और खांसते एवं छींकते समय, मुंह नाक ढंके। उन्होने कहा कि संक्रमण को रोकना सबकी जिम्मेदारी है, विशेषकर त्योहार के समय सबको कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन करना चाहिए। श्री जचारिया ने कहा कि यूरोप के कुछ देशों मे संक्रमण की दूसरी लहर आ गई है। जर्मनी में सितंबर में 1000 केस प्रतिदिन आ रहे थे जो अब बढ़कर 14 हजार प्रतिदिन हो गए हैं। ब्रिटेन में पिछले माह 3000 केस प्रतिदिन थे जो अब बढ़कर 20 हजार प्रतिदिन हो गए हैं। इसी प्रकार फ्रंास, इटली, स्पेन में भी संक्रमण बढ़ रहा है और लॉकडाउन एवं अन्य प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होने कहा कि इन सबको देखते हुए हमें सतर्क रहने की जरूरत है। हल्के लक्षण होने पर भी तुरंत चिकित्सक से मिलकर कोरोना का टेस्ट कराना चाहिए।

यूनीसेफ छत्तीसगढ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ श्रीधर र्यावांकी ने कहा कि जून में प्रदेश में कोरोना के तीन हजार से कम केस थे लेकिन लोग पूरी सावधानी ले रहे थे और अब लगभग 2-3 हजार केस रोज आ रहे है और 179000 केस हो गए हैं फिर भी लोग मास्क नही पहन रहे, कोरोना अनुकूल व्यवहार का पालन नही कर रहे। उनका कहना है कि कोई भी बुखार कोविड 19 हो सकता है और, यदि वायरस का संक्रमण हुआ हो तो इसके लक्षण 2 से 14 दिनों के अंदर दिखते हैं। कोई लक्षण नही होने पर भी दूसरों को उससे संक्रमण हो सकता है। इसलिए दूसरों से मेलजोल के समय मास्क पहनना आवश्यक हो जाता है। किसी भी तरह की बीमारी को नजर अंदाज नही करना चाहिए क्योंकि छाती में दर्द, तेज सिरदर्द, सूंघने एवं स्वाद की क्षमता का कम होना, डायरिया आदि लक्षण वाले व्यक्ति भी कोरोना पाजिटिव हो सकते हैं। ऐसे व्यक्ति जिन्हे दूसरी बीमारी जैसे हाइपरटेंशन, डायबिटीज आदि है, उन्हे संक्रमण होने पर मृत्यु दर अधिक है। उन्होने कहा कि प्रदेश में लगभग 2हजार से अधिक मौतें कोरोना के कारण हूई हैं। इसलिए जल्दी टेस्ट करवा के इलाज प्रारंभ कराने से ही मृत्यु दर कम हो सकती है। उन्होने कहा कि मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि जब मरीज ने लापरवाही बरती इलाज में और सांस फूलने पर ही अस्पताल में भर्ती हुए जिससे उनका जीवन बचाने में कठिनाई हुई क्योंकि उस समय तक उनके फेफड़े क्षतिग्रस्त हो चुके थे। श्री श्रीधर ने कहा कि कम लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में रखकर चिकित्सक की देखरेख में इलाज कर सकते हैं, यदि मरीज हाई रिस्क ग्रुप में न हो तो, अन्यथा अस्पताल में ही इलाज कराना चाहिए। तनाव से बचने के लिए शारीरिक गतिविधियां नियमित रूप से करनी चाहिए।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
Exit mobile version