मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 496 को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने केन्द्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। उक्त जानकारी देते हुए भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने आगे बताया है कि वित्त विभाग ने 30 अक्टूबर 2000 को परिपत्र जारी कर एकीकृत मध्यप्रदेश के पेंशनरी दायित्व का निर्धारण जनसंख्या के अनुपात में करते हुए मध्यप्रदेश से 73.38 एवं छत्तीसगढ़ से 26.62 निश्चित कर दोनों राज्यों से पेंशनरी दायित्वों की वसूली हेतु महालेखाकार छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश को अधिकृत किया गया। तदनुसार सन् 2001 से दोनों राज्यों के महालेखाकार द्वारा एकीकृत मध्यप्रदेश के पेंशनरी दायित्वों के वसूली तालिका में महंगाई राहत (डीआर) वसूली का कोई उल्लेख नहीं है। इसी को लेकर मध्यप्रदेश पेंशनर वेलफेयर एसोशिएशन भोपाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक डब्लू पी 31443/2024 द्वारा वाद दायर किया गया है। याचिका में मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 (6) के अंतर्गत उत्तरवर्ती राज्य मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को महंगाई राहत देने के पूर्व आपस में ली जा रही सहमति को चुनौती दी गई है। इस पर 23 जुलाई 25 को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद जस्टिस विवेक जैन ने गृह मंत्रालय भारत सरकार के साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार को भी नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई की तारीख 8 सितंबर 2025 नियत किया गया है। प्रकरण पर पैरवी अधिवक्ता कपिल शर्मा द्वारा की जा रही है। जारी विज्ञप्ति में कर्मचारी नेता वीरेन्द्र नामदेव ने आगे बताया है कि इस धारा 49 की गलत व्याख्या की वजह से छत्तीसगढ़ में लगभग डेढ़ लाख और मध्यप्रदेश के साढ़े पांच लाख पेंशनर्स लगभग 24 वर्षों से महंगाई राहत (डीआर) में केन्द्र सरकार के समान घोषित आर्थिक लाभ प्राप्त करने से वंचित है और दोनों राज्यों में पेंशनर संगठन लगातार धारा 49 को विलोपित कर केन्द्र सरकार के समान महंगाई राहत देने की मांग कर रहे हैं।

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