मुंबई । दिग्गज अभिनेता संजय मिश्रा अब ‘घाशीराम कोतवाल’ के नए हिंदी रूप में नाना फडणवीस का किरदार निभाते नजर आएंगे। यह नाटक 14 अगस्त को हिंदी में प्रीमियर करेगा और इसकी गूंज थिएटर से निकलकर राजनीति की गलियों तक सुनाई देगी।

18वीं सदी की कहानी, आज के सवाल
विजय तेंडुलकर की लिखी यह क्लासिक मराठी राजनीतिक कृति, जिसे हिंदी में वसंत देव ने रूपांतरित किया है, पेशवा शासन, सत्ता की चालबाजियों और सामाजिक शोषण को केंद्र में रखती है। इसे अभिजीत पानसे और भालचंद्र कुबल ने निर्देशित किया है, और इसका निर्माण आकांक्षा ओमकार माळी और अनिता पालांडे ने किया है।

“नाना सिर्फ किरदार नहीं, सोच है” – संजय मिश्रा
अपने किरदार को लेकर संजय मिश्रा कहते हैं, “नाना सिर्फ इतिहास में दर्ज एक नाम नहीं, वो आज के सत्ता तंत्र की सोच है। ये नाटक आज के भारत का भी आईना है।”

संतोष जुवेकर ‘घाशीराम’ की भूमिका निभा रहे हैं और कहते हैं कि यह किरदार कभी पीड़ित, कभी साजिशकर्ता और कभी एक ट्रैजिक हीरो बनता है। इसको जीना जैसे कांटों पर चलना है।

उर्मिला कानेटकर, जो गुलाबी का रोल निभा रही हैं, इसे “दर्द, कविता और विद्रोह की आवाज़” बताती हैं। कोरियोग्राफर फुलवा खामकर ने इस प्रस्तुति को संगीत, लावणी और समकालीन सवालों से जोड़ा है।

क्यों देखें ये नाटक?
सत्ता और नैतिक पतन पर बेधड़क सवाल
लावणी, कोरियोग्राफी और पॉलिटिकल ड्रामा का अनोखा संगम
संजय मिश्रा की अब तक की सबसे सियासी और तीखी भूमिका

‘घाशीराम कोतवाल’ सिर्फ नाटक नहीं, एक चुभती हुई टिप्पणी है — आज के दौर पर।

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