जैन धर्म का सबसे प्रतिष्ठित आत्मिक पर्व पर्युषण इस साल सबको आध्यात्मिक जागरण की ओर ले जाएगा. श्वेतांबर जैन पंचांग के अनुसार यह पर्व 20 अगस्त 2025 (बुधवार) से 27 अगस्त 2025 (बुधवार) तक आठ दिवसीय कार्यक्रम के रूप में मनाया जाएगा, जिसका समापन संवत्सरी (क्षमायाचना दिवस) पर होगा.

पर्युषण क्यों महत्वपूर्ण है?

यह समय आत्म-नियंत्रण, तप, उपवास, प्रवचन और क्षमायाचना का होता है. इन दिनों श्रद्धालु स्वयं की आत्मा की समीक्षा करते हैं. स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और गहरी चिंतन-मनन प्रक्रिया के माध्यम से आंतरिक शुद्धि का प्रयास करते हैं. पर्युषण पर्व, बाह्य दिखावे से परे जाकर आत्मा की शुद्धि की दिशा में पहला कदम है. यह संदेश देता है कि सच्ची साधना केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है

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