क्या आपने कभी सुना है कि कोई तालाब भी चोरी हो सकता है? सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कुछ ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

रीवा जिले के चाकघाट क्षेत्र में ‘अमृत सरोवर योजना’ के तहत एक तालाब बनना था, जिसकी लागत करीब 25 लाख रुपए थी। सरकारी दस्तावेजों में यह तालाब बाकायदा 9 अगस्त 2023 को तैयार भी हो गया। लेकिन जब स्थानीय ग्रामीण इस ‘तैयार तालाब’ को देखने पहुंचे, तो उन्हें वहां सिर्फ सूनी जमीन मिली – ना कोई तालाब, ना पानी, ना कोई निर्माण कार्य।

ढोल पीटकर खोजा जा रहा तालाब!
तालाब की जमीन पर कुछ भी न पाकर ग्रामीण हैरान-परेशान हो गए। जब प्रशासन से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने ढोल-नगाड़े बजाकर पूरे गांव में एलान करवा दिया — “जो भी इस गायब तालाब का सुराग देगा, उसे इनाम मिलेगा!”

आरटीआई से खुला घोटाले का राज
गांव वालों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जवाब मांगा। जवाब मिला तो सभी दंग रह गए। RTI के जरिए पता चला कि तालाब ग्राम कठौली के खसरा नंबर 117 पर बना दिखाया गया है। लेकिन हकीकत में वहां कोई तालाब था ही नहीं।

सरपंच पर बड़ा आरोप
इस पूरे मामले में ग्राम सरपंच पर गंभीर आरोप लगे हैं। RTI दस्तावेजों और ग्रामीणों के अनुसार, सरपंच ने पास ही के एक नाले को बांधकर अपनी निजी जमीन (खसरा नंबर 122) में पानी इकट्ठा कर लिया और उसे ही तालाब बताकर 24.94 लाख रुपए की सरकारी राशि निकाल ली।

प्रशासन हरकत में आया, जांच शुरू
शिकायत के बाद मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा। रीवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से सरपंच से पूरी रकम वसूलने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, जिला कलेक्टर ने भी जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय पुलिस का कहना है कि यह ‘चोरी’ नहीं, बल्कि भारी अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला है, जिसकी जांच की जा रही है।

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