रायपुर। कहते है अंत भला तो सब भला…, लेकिन यह कहावत उन लोगों के लिए चरितार्थ होती नहीं दिख रही है जो लोग से बरसों से शिक्षा के क्षेत्र में शासकीय सेवक के रूप में समर्पित रहे और एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त हो रहे हो। इन दिनों राज्य के शासकीय सेवक राज्य सरकार के द्वारा लाया गया न्यू पेंशन स्कीम याने कि एनपीएस की मार सहने को मजबूर है। कई संगठनों ने एनपीएस का विरोध किया और पुरानी पेंशन प्रणाली को लागू करने की मांग किया है। इसके लिए धरना-प्रदर्शन और शांतिपूर्ण आंदोलन का दौर चल रहा है। आपको बता दें कि सरकार की एनपीएस की मार सेवानिवृत्त होने कर्मचारियों पर कैसे पड़ती यह पीड़ा वो ही अच्छी तरह से जान सकता है जो उस पीड़ा को सहता है। इसी कड़ी में आपको बतातें है कि पूरे देश में 2004 के बाद के कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) लागू है। इस पेंशन योजना के दुष्परिणाम लगातार सामने देखने को मिल रहा है। जिसके प्रति पूरे देश के शासकीय कर्मचारी आंदोलित हैं, आक्रोशित हैं, और अपने भविष्य को लेकर भय और असुरक्षा से भर गए है। एनपीएस की विभीषिका का ताजा उदाहरण शिक्षिका श्रीमती मीरा तिवारी शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मोपका, विकासखंड बिल्हा, जिला- बिलासपुर छत्तीसगढ़ है। जो कि इस पेंशन योजना की मार झेल रही हैं। 22 साल की लगातार सेवा करने के बाद भी आज उन्हें संतुष्टि दायक सेवा पुरस्कार नहीं मिला। जितनी राशि का हम मासिक मोबाइल रिचार्ज करवाते हैं उतना ही उनका पेंशन बना है। एनपीएस की राशि को शेयर बाजार और म्युचुअल फंड के जोखिमों में धकेल दिया गया है। शुरू शुरू में कर्मचारियों को इस घातक पेंशन योजना के विषय में जानकारी नहीं थी इस योजना को लॉलीपॉप बनाकर पेश किया गया, लेकिन जैसे-जैसे इसके दुषपरिणाम सामने आने लगे कर्मचारियों ने पूरे देश में इसका विरोध चालू कर दिया.. फिर भी सरकार के कान खड़े नहीं हुए हैं, और ना ही सरकारों को कोई लेना-देना है। सरकार सिर्फ अपना बजट बचाना चाहती है, जो कि कर्मचारियों के प्रति घोर अन्याय हैं। राजनीतिक नेताओं को पुरानी पेंशन योजना मिलती है जिससे वह अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह से सुरक्षित है; लेकिन शासकीय कर्मचारी अन्याय झेल रहे हैं। इससे भी घोर आश्चर्य की बात यह है कि कुछ शासकीय कर्मचारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हैं और सोए हुए हैं छत्तीसगढ़ अंशदायी पेंशन कर्मचारी कल्याण संघ के द्वारा छत्तीसगढ़ में समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से एनपीएस को खत्म करने के लिए अभियान छेड़ा हुआ है पर शासकीय कर्मचारियों में जितनी सक्रियता दिखनी चाहिए वह नजर नहीं आती एनपीएस की विभीषिका का ताजा उदाहरण-
शिक्षिका श्रीमती मीरा तिवारी
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मोपका
विकासखंड बिल्हा जिला बिलासपुर
प्रथम नियुक्ति तिथि 22.12. 1998
सेवानिवृत्ति तिथि 01.06. 2019
कुल जमा राशि 3,64,132
नगद प्राप्त 2,21,409
अंतिम वेतन 50,640
मासिक पेंशन राशि 782
मिला है।
गुरु प्रसाद देवांगन प्राथमिक शाला बुंदेला संकुल केंद्र सेवार विकासखंड बिल्हा.. प्रथम नियुक्ति जुलाई 2009 सेवानिवृत्ति जुलाई 2020 कुल सेवा 11 वर्ष एनपीएस जमा राशि 270000 नगद प्राप्त राशि 162000 पेंशन बना मात्र ₹549 ग्रेजुएटी उपादान अभी स्पष्ट नहीं है और अप्राप्त है।
छत्तीसगढ़ अंशदायी पेंशन कर्मचारी कल्याण संघ/ नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के प्रदेश अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने कहा है कि कर्मचारियों को इस उदाहरण को देखकर पुरानी पेंशन बहाली के विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय हो जाना चाहिए अन्यथा हर वर्ष हजारों कर्मचारी सेवा नियुक्त होंगे और उन्हें इस विभीषिका का सामना करना ही पड़ेगा जितनी जल्दी हो सके हमें अपनी एकजुटता और सक्रियता से छत्तीसगढ़ से पुरानी पेंशन को जड़ से खत्म करना है इसके लिए हमें मजबूत संघर्ष करना होगा। उक्त आशय की जानकारी श्रीमती आशा कँवर ब्लॉक अध्यक्ष बिल्हा महिला प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ अंशदायी पेंशन कर्मचारी कल्याण संघ नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम ने दिया है।
नाम-किरण सिह
स्कूल-एचएसएस भांडी बिल्हा
प्रथम नियुक्ति-07/08/98
सेवानिवृत्त-30/06/18
कुल जमा-400000/-
मिला-265000/-
बचा-135000/-
पेंशन-1171/-
नई पेंशन योजना क्या है?
नई पेंशन व्यवस्था यानी राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) 1 जनवरी, 2004 को या उसके बाद केंद्र सरकार (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए सभी नई भर्तियों के लिए अनिवार्य योगदान योजना है। कुछेक राज्यों को छोड़कर सभी राज्य सरकारों ने इसे अनिवार्य बना दिया है। 2013 में स्थापित एक स्वतंत्र पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए), एनपीएस को नियंत्रित करता है।
यह अमेरिकी मॉडल पर आधारित योजना है जिसे आम भाषा में निजी पेंशन या पेंशन का निजीकरण कह सकते हैं। यह 2003 में पूर्व एनडीए सरकार द्वारा लागू की गई थी। जबिक पेंशन नियामक की स्थापना के बारे में 2004 में कानून यूपीए द्वारा भाजपा के समर्थन से पारित किया गया था। बड़े पेंशन फंड को इक्विटी और बांडों में निवेश किया जाता है, जिससे बाजार संबंधी जोखिम बढ़ जाता है।
एक निश्चित कट ऑफ तिथि के बाद शामिल होने वाले कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य है, साथ ही उनके वेतन का 10त्न स्वचालित रूप से निधि में जा रहा है। त्रिपुरा कुछ ऐसे राज्यों में से एक था, जो अपने कर्मचारियों के लिए एनपीएस लागू नहीं कर रहा था और पुरानी पेंशन योजना को जारी रखे हुआ था, यानी जो कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से अर्जित किए गई पेंशन को जोखिम में नहीं डालता था लेकिन अब वहां भी भाजपा के शासन में आने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया है। और नई पेंशन स्कीम लागू कर दी गई है।
नई पेंशन पुरानी पेंशन से किस तरह अलग है?
1- पुरानी पेंशन पाने वालों के लिए जीपीएफ सुविधा उपलब्ध है जबकि नई पेंशन योजना में जीपीएफ नहीं है। जीपीएफ पर ब्याज दर निश्चित है जबकि एनपीएस पूरी तरह शेयर पर आधारित है।
2-पुरानी पेंशन वालों के परिवार वालों को सेवाकाल में मृत्यु पर डेथ ग्रेच्युटी मिलती है जो सातवें वेतन आयोग ने 10 लाख से बढाकर 20 लाख कर दिया है जबकि नई पेंशन वालों के लिए डेथ ग्रेच्युटी की सुविधा अभी हाल ही में की गयी है।
3-पुरानी पेंशन योजना में रिटायरमेन्ट के समय एक निश्चित पेंशन (अन्तिम वेतन का 50 प्रतिशत) की गारंटी थी जबकि नई पेंशन योजना में पेंशन कितनी मिलेगी यह निश्चित नहीं है यह पूरी तरह शेयर मार्केट व बीमा कम्पनी पर निर्भर है।
4- पुरानी पेंशन सरकार देती है जबकि नई पेंशन बीमा कम्पनी देगी। यदि कोई समस्या आती है तो हमें सरकार से नहीं बल्कि बीमा कम्पनी से लडऩा पडेगा।
5-पुरानी पेंशन पाने वालों के लिए रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी ( अंतिम वेतन के अनुसार 16.5 माह का वेतन) मिलता है जबकि नयी पेंशन वालों के लिये ग्रेच्युटी की व्यवस्था सरकार ने हाल ही में की है।
6- पुरानी पेंशन के लिए वेतन से कोई कटौती नहीं होती है जबकि नयी पेंशन योजना में वेतन से प्रति माह 10 प्रतिशत की कटौती निर्धारित है।
7-पुरानी पेंशन में आने वाले लोगों को सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके परिवार को पारिवारिक पेंशन मिलती है जबकि नयी पेंशन योजना में पारिवारिक पेंशन को समाप्त कर दिया गया है, लेकिन अब सरकार इस पर विचार कर रही है।
8-पुरानी पेंशन पाने वालों को हर छह माह बाद महँगाई तथा वेतन आयोगों का लाभ भी मिलता है जबकि नई पेंशन में फिक्स पेंशन मिलेगी। महँगाई या वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलेगा। यह एक बहुत बड़ा नुकसान है।
9-पुरानी पेंशन योजना वालों के लिए जीपीएफ से आसानी से लोन लेने की सुविधा है जबकि नयी पेंशन योजना में लोन की कोई सुविधा नही है (विशेष परिस्थिति में कठिन प्रक्रिया है केवल तीन बार वह भी रिफण्डेबल)।
11-पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ निकासी (रिटायरमेंट के समय) पर कोई आयकर नहीं देना पडता है जबकि नयी पेंशन योजना में जब रिटायरमेंट पर जो अंशदान का 60 प्रतिशत वापस मिलेगा उसपर आयकर लगेगा।
