रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री तथा छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव और भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा ने जारी सँयुक्त विज्ञप्ति में स्वास्थ्य विभाग पर जानबूझकर लापरवाही करने और राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय, मेडिकल कालेज द्वारा संचालित बड़े अस्पताल तक हर स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर पेंशनरों की घोर उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अपने सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों की वृद्धावस्था में स्वास्थ्य की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य के सभी सरकारी चिकित्सा केन्द्रो में नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श के साथ-साथ नि:शुल्क इलाज और जरूरत पर नि:शुल्क दवाई उपलब्ध कराने की योजना संचालित है और यदि चिकित्सक के द्वारा पर्ची में लिखे दवा चिकित्सा केन्द्र में उपलब्ध नही है तो उस दवा को अस्पताल प्रशासन द्वारा दवाई दुकान से सरकारी बजट से खरीदकर पेंशनर को देने का प्रावधान है। परन्तु सरकारी उदासीनता के कारण इस नियम से प्रदेश 95 प्रतिशत पेंशनर अनभिज्ञ है और तो और विचित्र विडम्बना है कि अस्पताल प्रशासन के 95 प्रतिशत चिकित्सक एवं स्टाफ को भी इस योजना की कोई जानकारी नहीं है। कुछ जागरूक पेंशनर जो नियमों के प्रावधान से अवगत है और इसका लाभ उठा रहे हैं, वे भी विगत लगभग 9 माह से अधिक समय से रायपुर मेडिकल कालेज अस्पताल और जिला चिकित्सालय रायपुर में लगातार चक्कर लगा रहे हैं, राजधानी रायपुर की तरह प्रदेश के अन्य जिलों में स्थिति ज्यादा बदतर है। जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया कि जिस दवा की जरूरत है वह अस्पताल में है नही और अस्पताल प्रशासन उसे बाजार से खरीद कर उपलब्ध भी नहीं करा रहे है तथा बजट की कमी का रोना रो रहे हैं और जो बजट है, उसका उपयोग नही कर रहे हैं। जिससे पेंशनर अपने मिलने वाली मासिक पेंशन राशि से बाजार से जरूरी दवा खरीदने के लिये मजबूर हैं। संघ को जानकारी मिली है कि मुख्यचिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय रायपुर में विगत 3 वर्षो से पेंशनरों के दवा खरीदी हेतु शासन द्वारा दी जाने वाली बजट बिना उपयोग लेप्स हो रहा है, पता चला है कि उक्त बजट को मुख्यचिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जिले के सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों को आबंटन कर पेन्शनरो को स्वास्थ्य सुरक्षा के तहत दवा एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहिए, परन्तु लापरवाही का आलम यह है कि न तो इसकी चिंता न तो जिले मुख्यचिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को हैं और न ही विकास खण्ड चिकित्सा अधिकारी को हैं इन स्वास्थ्य के अधिकारियों को इसमें कोई रुचि नही है,इसतरह पेंशनरों की मुफ्त चिकित्सा योजना का प्रदेश में माखौल उड़ाया जा रहा है। आलम यह है कि प्रदेश के ऊपर से लेकर नीचे तक स्वास्थ्य अधिकारियों को इसमें कोई रुचि नहीं है। वृद्धावस्था में गुजर बसर करने वाले पेंशनरों स्वास्थ्य की सुरक्षा पर किसी का ध्यान नहीँ हैं। जबकि सबको सेवानिवृत्त होने के बाद इसी दौर से गुजरना है। जारी विज्ञप्ति में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री सहित प्रदेश के उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लेकर पेंशनरों को इस महत्वपूर्ण योजना से अवगत कराने की योजना बनाने और इस योजना से लाभ पहुँचाने का आग्रह किया है।
