पूरे देश में आज धूमधाम से धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है. आज के दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है. धनतेरस के दिन इनकी पूजा करने से घर में धन की कमी नहीं होती है. साथ ही परिवार के लोगों की सेहत भी सही बनीं रहती है. धनतेरस त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में मनाया जाता है, जो सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है. इस समय स्थिर लग्न, खासकर वृषभ लग्न, में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे मां लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से विराजमान होती हैं. धनतेरस पर शाम को 13 दीपक जलाकर भगवान कुबेर की पूजा करना शुभ है. जानिए धनतेरस का हर अपडेट…

  1. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है. धनतेरस को धन और स्वास्थ्य दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. 
  2. देशभर में कई ऐसे मंदिर हैं, जो धन के देवता कुबेर को समर्पित हैं, लेकिन पुष्कर में भगवान कुबेर का ऐसा मंदिर है, जो साल भर में सिर्फ एक बार खुलता है.
  3. राजस्थान का पुष्कर ब्रह्मा मंदिर सिर्फ भगवान ब्रह्मा को नहीं, बल्कि भगवान कुबेर को भी समर्पित है. देश के अलग-अलग राज्यों में भगवान कुबेर के मंदिर हैं, लेकिन पुष्कर में भगवान कुबेर ब्रह्मा जी के साथ विराजमान हैं. ज्यादातर मंदिरों में भगवान कुबेर को भगवान शिव के साथ देखा गया है, जो सुख और संपत्ति दोनों का आशीर्वाद देते हैं, लेकिन पुष्कर ब्रह्मा मंदिर अलग है. 
  4. खास बात ये है कि मंदिर साल भर खुला रहता है, लेकिन भगवान कुबेर साल में एक दिन धनतेरस के मौके पर ही दर्शन देते हैं और उनके दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं. 
  5.  -माना जाता है कि भगवान कुबेर पैसे से जुड़ी हर समस्या का निदान करते हैं और भगवान ब्रह्मा जीवन में आए उतार-चढ़ाव को कम करते हैं। इन्हीं मान्यताओं की वजह से धनतेरस के दिन मंदिर में खास भीड़ देखी जाती है.

मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष के दिन भगवान धन्वंतरि प्रकट हुआ थे. समुद्र मंथन के दौरान धन्वंतरि हाथ में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे. भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना जाता है.

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा भी की जाती है. भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना गया है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से घर के लोगों की रक्षा रोगों से होती है. मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष के दिन ही भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे. धन्वंतरि हाथ में अमृत का कलश लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे. इसलिए धनतेरस पर माता लक्ष्मी और कुबरे भगवान के साथ-साथ इनकी पूजा करने का भी विधान है

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