शराब घोटाले में फंसे आबकारी विभाग के राजपत्रित अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली हैं। शीर्ष अदालत ने इन अधिकारियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक को ट्रायल की अवधि तक जारी राखा हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत सशर्त है और अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं ताकि वे जांच और साक्ष्यों को प्रभावित न कर सकें। यह मामला फरवरी 2019 से जून 2022 के बीच हुए संगठित सिंडिकेट द्वारा अवैध शराब बिक्री और डुप्लीकेट होलोग्राम लगाने से जुड़ा हैं, जिसमें सहायक और उप आबकारी आयुक्त जैसे उच्च पदों के याचिकाकर्ता आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने पिछली अंतरिम सुरक्षा की शर्त के अनुसार ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है और जमानत बांड भी भर दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता उच्च पदों पर है, इसलिए गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित होने से रोकने के लिए कड़ी शर्ते लगाना आवश्यक हैं।

