रायपुर – परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने आज गीता ज्ञान अमृत वर्षा की कथा में बताएं कि ज्ञान ,भक्ति,ध्यान सब कुछ प्रदर्शन करने की विषय वस्तु नहीं है अपितु इन सब का हमें दर्शन करना चाहिए । प्रयागराज में ज्ञान की देवी मां सरस्वती लुप्त है यह संकेत देती है कि हमें जहां पर आवश्यकता हो वहीं पर ज्ञान प्रकट करना चाहिए। सभी जगह अपनी ज्ञान का प्रदर्शन नहीं करे, ज्ञान का दर्शन करना चाहिए, सब तरह से ज्ञान लेना चाहिए। माँ गंगा भक्ति का प्रतीक है जो निरंतर बह रही है, भक्ति निरंतर प्रमात्मैक प्रति होनी चाहिए भक्ति में दिखावा नहीं होनी चाहिए । आगे भगवान कहते हैं कि ध्यान से श्रेष्ठ ज्ञान है और उससे भी श्रेष्ठ कर्मफलों का त्याग है । लीन होकर कर्म करना लेकिन बिना किसी कामना के कर्म करना, कर्म के फलों का त्याग करना श्रेष्ठ होता है,इस प्रकार का कर्म यज्ञ बन जाता है, नारायण स्वयं यज्ञ है यज्ञ की तरह कर्म करने की बात बताई गई। कर्म के फलों की त्याग से फल रहित कर्म करने से मन में शांति होती है।काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही ,आयोजक श्रीमती कविता चिंतामणि कश्यप ने बताया कि कल 3:00 बजे से हवन होगा जो कि जल और पुष्प से किया जाएगा। उक्त की जानकारी श्रीमती कल्पना शुक्ला जी द्वारा प्रदान की गई।

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