देसी अंडों की डिमांड ज्यादा और सप्लाई कम होती है. यूपी के मुरादाबाद में सफेद अंडों को रंगकर देसी अंडा दिखाने के गोरखधंधे का भंडाफोड़ हुआ है. ये लोग केमिकल और घरेलू चीजों के जरिए सफेद अंडों को रंगकर महंगे दामों पर बेचने के लिए तैयार करते थे. 

दोगुनी कीमत पर बिकते हैं देसी अंडे

सफेद अंडा मार्केट में करीब 8 रुपये का बिकता है, जबकि देसी अंडा लगभग दोगुने दाम पर मिलता है. रेट में इसी फर्क का फायदा उठाकर मुरादाबाद में अंडों को रंगने का गोरखधंधा चलाया जा रहा था. खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मुरादाबाद के काशीपुर रोड , बरवाड़ा माजरा स्थित एक गोदाम में छापा मारकर करीब 45,360 नकली रंगे हुए अंडे और 35,640 सफेद अंडे जब्त किए हैं. गोदाम में सफेद अंडों को आर्टिफिशियल रंग और केमिकल से रंगकर पॉलिश करके देसी अंडों जैसा बनाया जाता था. अधिकारियों ने मौके से रंगे हुए अंडों के अलावा रंगाई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की है. 

कैसे बनाते थे सफेद अंडे को देसी अंडा?

सफेद अंडों को देसी अंडा जैसा कलर देने के लिए ये लोग कत्था, चायपत्ती और सिंदूर के घोल का इस्तेमाल करते थे. बताया गया कि इसके लिए दो तरीके इस्तेमाल किए जाते थे. पहले तरीके में चाय की पत्ती पानी में उबालकर उसमें सफेद अंडे डुबोकर रखे जाते थे. बाद में इन अंडों को भूसे में रखा जाता था और उस पर सिंदूर लगा दिया जाता था. 

दूसरे तरीके में पान में इस्तेमाल होने वाले कत्थे को पानी में गरम करके सफेद अंडों को उसमें रखा जाता था. इससे सफेद अंडों का रंग गुलाबी जैसा हो जाता था और उन्हें देसी अंडा बताकर बेचने के लिए भेज दिया जाता था. 

सफेद अंडा और देसी अंडे में क्या फर्क?

मार्केट में दो तरह के अंडे मिलते हैं, एक सफेद रंग और दूसरे भूरे या क्रीम कलर का, जिसे देसी अंडा भी कहा जाता है. वैसे तो दोनों ही तरह के अंडों में पौष्टिक तत्व होते हैं, लेकिन दोनों के स्वाद, पोषण वगैरा का फर्क होता है. 

  • देसी अंडे उन मुर्गियों के होते हैं जो प्राकृतिक वातावरण में खुले में घूमती हैं. इन मुर्गियों को पिंजरों में नहीं रखा जाता. वो घास, कीड़े और बीज आदि खाकर पेट भरती हैं,  जिससे उनके आहार नेचुरल और वैरायटी वाला है. इससे देसी अंडों में पोषण ज्यादा मिलता है. 
  • देसी अंडों में प्रोटीन सफेद अंडों की तुलना में थोड़ा ज्यादा होता है. ओमेगा-3, विटामिन ए, डी और ई भी अधिक होते हैं. देसी अंडों में मिलने वाले एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्युनिटी के लिए बेहतर होते हैं.
  • सफेद अंडे अक्सर पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों से तैयार करवाए जाते हैं. उनका आहार मुख्य रूप से मक्का और अनाज तक सीमित होता है, जो उन्हें एक समान रूप से दिया जाता है. इससे इनमें पोषण तो मिलता है, लेकिन देसी अंडों की तुलना में थोड़ा कम होता है. 

अंडा असली या नकली, कैसे पहचानें?

असली और नकली अंडे की पहचान के लिए उसके छिलके की बनावट, पानी में डूबने का तरीका, हिलाने पर आवाज, गंध और आग पर रखकर देखने जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. असली अंडे का छिलका खुदरा और दानेदार होता है, जो पानी में डूब जाता है और हिलाने पर आवाज नहीं करता है. नकली अंडे का छिलका चिकना और चमकदार होता है. यह पानी में डालने पर तैरता है और हिलाने पर आवाज भी करता है. एक गिलास में ठंडा पानी भरें और उसमें अंडा डाल  दें. अगर अंडा पानी में सीधा नीचे डूब जाए और अपनी साइड पर पलट जाता है तो वह ताजा है. अगर अंडा नीचे डूब जाए, लेकिन उसका बड़ा सिरा ऊपर की ओर हो जाए, तो वह कुछ दिनों पुराना हो सकता है लेकिन खाया जा सकता है. अगर अंडा पानी की सतह पर तैरने लगे तो वह खराब होता है और उसे फेंक देना चाहिए.

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