सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कर मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि आवासीय मकान को किराये पर देने पर मिलने वाली GST छूट तब भी लागू रहेगी जब किरायेदार उस संपत्ति को आगे सब लीज पर देकर हॉस्टल या पेइंग गेस्ट सुविधा चलाता है। अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए राजस्व विभाग की अपील खारिज कर दी।

निर्णय में कहा गया कि 28 जून 2017 की GST छूट अधिसूचना में यह अनिवार्य नहीं है कि किरायेदार खुद उस संपत्ति को निवास के रूप में इस्तेमाल करे। केवल अंतिम उपयोग का आवासीय होना ही पर्याप्त है। अदालत ने साफ किया कि लंबे समय के लिए दिए जाने वाले हॉस्टल या PG आवास भी residential dwelling की ही श्रेणी में आते हैं।

जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डिवीजन बेंच ने यह फैसला कर्नाटक के एक चार मंजिला आवासीय भवन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया। यह भवन 42 कमरों वाला है जिसे मालिक ने एक निजी कंपनी को किराये पर दिया था।

GST विभाग का कहना था कि किरायेदार एक व्यावसायिक कंपनी है जो स्वयं भवन में नहीं रहती, बल्कि उसे आगे किराये पर देकर व्यापारिक लाभ कमाती है, इसलिए इस पर 18 प्रतिशत GST लगना चाहिए। AAR और AAAR ने भी विभाग की व्याख्या को सही माना था, लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट ने इन आदेशों को रद्द कर दिया था।

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