रायपुर। प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में पेशा कानून लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासी समाज के मुखिया एवं प्रमुख लोगों तथा पंचायत प्रतिनिधियों और स्वयं सेवी संस्थाओं से रायशुमारी की जा रही है। पेशा कानून के क्रियान्वयन के लिए नियम बनाने हेतु प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव की अध्यक्षता में आज कांकेर जिले के चारामा विकासखण्ड अंर्तगत ग्राम खैरखेड़ा में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर, बालोद, राजनांदगांव और धमतरी जिला के कुल 16 विकासखण्डों के आदिवासी समाज के मुखिया शामिल हुए। उन्होंने पेशा कानून के क्रियान्वयन हेतु बनाये जाने वाले नियमों के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दिये। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों मे ंपेशा कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। पेशा कानून के क्रियान्वयन के लिए नियम बनाये जा रहे हैं, जिसके लिए लोगों का सुझाव लिया जा रहा है, जो भी उपयोगी सुझाव प्राप्त होगा, उसे नियमों में शामिल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि आगामी बजट सत्र में पेशा कानून के नियम को पारित कराने का प्रयास होगा। पूर्व सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री अरविंद नेताम ने पेशा कानून बनाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में आदिवासी क्षेत्रों के लिए पेशा कानून बनाया गया तथा इस कानून को संवारने में डॉ. बी.डी. शर्मा का बड़ा योगदान रहा है। श्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेशा कानून को लागू करने के लिए कार्यवाई की जा रही है, जो प्रशंसनीय है। पूर्व सांसद श्री सोहन पोटाई ने पेशा कानून के क्रियान्वयन हेतु बनाने जाने वाले नियमों के प्रत्येक बिन्दु में दण्ड का भी प्रावधान रखने का सुझाव दिया। उनके द्वारा आदिवासी संस्कृति के संवर्धन व संरक्षण तथा दैवीय स्थलों को संरक्षित करने के लिए भी पेशा कानून में नियम बनाने का सुझाव दिया गया। आदिवासी समाज के मुखिया लोगों के द्वारा ग्राम सभा का संरचना और कार्य एवं उसकी बैठकें, ग्रामसभा की स्थाई समितियां, ग्रामसभा कोष का गठन, ग्रामसभा द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं विकास कार्यों का अनुमोदन, अनुसूचित क्षेत्रों में लघु जल निकाय, गौंण खनिजों का खनन पट्टा, पर्यावरण संरक्षण, अनुसूचित क्षेत्रों में अतिक्रमण रोकने, धन उधार व्यवस्था, हाट-बाजार नियंत्रण, सामाजिक क्षेत्र के संस्थाओं एवं कर्मचारियों का नियंत्रण, नशीली पदार्थ की बिक्री एवं खपत का विनियमन, सांस्कृति विरासत और उसकी समृद्धि, लघु वनोपज का प्रबंधन, शांति, सुरक्षा तथा चुनाव के मामले में परम्परा और कानून, जैव विविधता का प्रबंधन एवं बौधिक संपदा, नियंत्रण और दण्ड, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, श्रम शक्ति एवं मानव साधन, ग्रामसभा में विकास कार्ययोजना का अनुमोदन इत्यादि के संबंध में अपने-अपने सुझाव दिये गये। पेशा कानून के क्रियान्वयन हेतु ग्राम खैरखेड़ा में आयोजित परिचर्चा में आदिवासी समाज के मुखिया लोगों के सुझाव प्राप्त करने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने जिला मुख्यालय कांकेर में आयोजित कार्यक्रम में जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के प्रतिनिधियों और स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी सुझाव प्राप्त किये, जिसमें जनपद पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष और सदस्यों के द्वारा अपने सुझाव दिये गये। कार्यक्रम में भानुप्रतापुर विधानसभा के विधायक एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्ष मनोज मण्डावी, विधायक कांकेर एवं संसदीय सचिव श्री शिशुपाल शोरी, विधायक सिहावा श्रीमती लक्ष्मी ध्रुव, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य नितिन पोटाई, बस्तर विकास प्राधिकरण के सदस्य बिरेश ठाकुर, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमंत ध्रुव एवं उपाध्यक्ष हेमनारायण गजबल्ला, जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सुभद्रा सलाम, नवलसिंह मण्डावी सहित विभिन्न जिलों के आदिवासी समाज के मुखिया एवं पदाधिकारी मौजूद थे।

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