रायपुर की प्यास बुझाने वाली ” जीवनदायिनी’ खारून नदी आज खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। विडंबना यह है कि शहर को जीवन देने वाला इसका जल अब शहरी और औद्योगिक कचरे के कारण “जानलेवा’ बनता जा रहा है। शहर के मुख्य नाले विशेषकर चिंगरी नाला, जो भारी मात्रा में झाग और रसायन लाता है और महादेव घाट के पास मिलने वाला रायपुरा नाला नदी की स्वच्छता को नष्ट कर रहे है। रिपोर्टों के अनुसार गोवर्धन नाला का पानी भी ट्रीटमेंट प्लांट की सीमाओं के कारण पुरी तरह साफ हुए बिना नदी में मिल रहा है। प्रदूषण का आलम यह है कि नदी के पुल के पास भारी मात्रा मेें फेंके गए मुर्गी के पंख और अन्य जैविक कचरा जमा मिला है। यह दृश्य न केवल जल की पवित्रता का अपमान है, बल्कि हैजा और पीलिया जैसी बीमारियों को सीधा न्योता भी है।
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