राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र के जालना में 2012 में हुए रेप केस के आरोपी की दया याचिका को खारिज कर दिया है. राष्ट्रपति के फैसले के बाद अब उसे फांसी की सजा मिलना तय माना जा रहा है. राष्ट्रपति भवन के अनुसार, यह याचिका 6 नवंबर 2025 को खारिज की गई थी. राष्ट्रपति मुर्मू के कार्यकाल (25 जुलाई 2022 से) में यह खारिज की गई तीसरी दया याचिका है.

क्या था 2012 का वो खौफनाक गुनाह?

यह जघन्य घटना 6 मार्च 2012 को जालना शहर के इंदिरा नगर इलाके में हुई थी. आरोपी रवि अशोक घुमारे ने मात्र 2 साल की मासूम बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपहरण कर लिया. उसने बच्ची को घर के पास ही एक कमरे में ले जाकर पलंग से हाथ-पैर बांधे, उसके साथ बलात्कार किया और फिर बेरहमी से हत्या कर दी. वारदात के बाद कमरे में ताला लगाकर वह फरार हो गया था. पुलिस ने शक के आधार पर रवि घुमारे को गिरफ्तार किया. 

तलाशी में बच्ची का शव बरामद हुआ. डीएनए रिपोर्ट और मेडिकल विशेषज्ञों की गवाही से साबित हो गया कि बच्ची के साथ जघन्य अपराध किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ केस करार देते हुए कहा था कि आरोपी ने अपनी कामुक इच्छाओं पर कोई नियंत्रण नहीं रखा और एक मासूम जीवन को निर्दयता से खत्म कर दिया.

सभी अदालतों तक पहुंचा मामला

सत्र न्यायालय: 16 सितंबर 2015 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए. एन. करमरकर ने डीएनए रिपोर्ट और चोटों की पुष्टि के आधार पर फांसी की सजा सुनाई.

बॉम्बे हाईकोर्ट: जनवरी 2016 में औरंगाबाद बेंच ने सजा को बरकरार रखा.

सुप्रीम कोर्ट: 3 अक्टूबर 2019 को तीन जजों की बेंच (जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई में) ने अपील खारिज कर फांसी की सजा कायम रखी.

इसके बाद आरोपी ने 2020 में महाराष्ट्र के राज्यपाल से दया याचिका दायर की, जो खारिज हो गई. अंत में राष्ट्रपति के पास पहुंची याचिका भी अब ठुकरा दी गई है. राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद पीड़ित बच्ची के परिवार ने राहत की सांस ली है. परिवार वालों ने राष्ट्रपति मुर्मू के निर्णय का स्वागत किया और सरकार से आरोपी को जल्द से जल्द फांसी देने की मांग की है.

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