उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 15 साल पहले अमेरिका से लौटे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी. हत्या के बाद उसके शव को 72 टुकड़ों में काटा और सबूत मिटाने के लिए शहर के अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया था. इस घटना के 15 साल बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है.
इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. यह मामला अक्टूबर 2010 का है. दिल्ली के रहने वाले राजेश गुलाटी और ओडिशा की अनुपमा ने 1999 में शादी की थी. दोनों पहले अमेरिका चले गए थे, लेकिन 2008 की आर्थिक मंदी में राजेश की नौकरी चली गई, तो वे भारत लौट आए और देहरादून में बस गए. बाद में राजेश को देहरादून की एक छोटी कंपनी में इंजीनियर की नौकरी मिली, लेकिन इसके बाद दंपति के रिश्ते खराब हो गए और झगड़े बढ़ गए.
हत्या के बाद शव के किए 72 टुकड़े
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 अक्टूबर 2010 की रात को झगड़े के दौरान राजेश ने अनुपमा को थप्पड़ मारा. इससे अनुपमा का सिर दीवार से टकराया और वह बेहोश हो गई. डर के मारे कि कहीं वह होश में आकर शिकायत न कर दे, राजेश ने उसकी हत्या कर दी. पुलिस के मुताबिक, बाद में राजेश ने इलेक्ट्रिक आरी और डीप फ्रीजर खरीदा, शव को 72 टुकड़ों में काटा और प्लास्टिक बैग्स में रखकर फ्रीजर में छिपा दिया. धीरे-धीरे इन टुकड़ों को देहरादून के सुनसान इलाकों में फेंकता रहा.
दो माह तक फ्रीजर में रखा शव
बच्चों ने जब मां के बारे में पूछा तो बताया कि वह नानी के घर चली गई हैं. हालांकि बच्चों को पता था कि मां डीप फ्रीजर में हैं. राजेश बच्चों को घुमाने के बहाने शव के टुकड़ों को अलग-अलग जगह फेंकता रहा. इस बीच जब अनुपमा के घर वालों से उसकी बात नहीं हुई तो शक हुआ. अनुपमा के भाई ने अपने एक दोस्त को पता करने के लिए कहा. भाई का दोस्त 11 दिसंबर को पासपोर्ट कर्मचार बनकर जब घर पहुंचा तो उसने बताया कि अनुपमा दिल्ली में हैं. इसके बाद राजेश पर दबाव बढ़ता चला गया और उसे पता था कि अब जल्द ही पोल खुलने वाली है. उसने विदेश भागने की तैयारी शुरू कर दी. वह पूरी पैकिंग कर चुका था. तभी 12 दिसंबर को अनुपमा का भाई पुलिस के साथ पहुंचा. पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर जब पूछताछ शुरू की तो पूरा खुलासा हुआ.

