महाराष्ट्र में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति की दिशा स्पष्ट कर दी है. स्थानीय स्तर पर हुए इस चुनाव को 2024 के बाद बदले सियासी समीकरणों की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा था. मतदाताओं ने शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थिर सरकार और स्पष्ट नेतृत्व को प्राथमिकता दी. चुनाव नतीजे बताते हैं कि गठबंधन की राजनीति में मतदाता अब भ्रम से बाहर निकल रहा है. स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और संगठन की मजबूती ने निर्णायक भूमिका निभाई.
महायुति ने 288 में से 215 सीटें जीतकर विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली. बीजेपी का 129 सीटों पर कब्जा उसका कैडर आधारित विस्तार दर्शाता है. शिंदे गुट की शिवसेना को 51 सीटें मिलना सरकार में हिस्सेदारी का असर दिखाता है. अजीत पवार की एनसीपी ने 35 सीटें जीतकर अपना स्वतंत्र आधार मजबूत किया. दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी सिर्फ 51 सीटों पर सिमट गई. कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, लेकिन गठबंधन कमजोर दिखा. यूबीटी और शरद पवार गुट की सीमित सीटें नेतृत्व संकट की ओर इशारा करती हैं.
| 1 | महायुति | भाजपा | 129 |
| 2 | शिवसेना (शिंदे) | 51 | |
| 3 | एनसीपी (अजीत) | 35 | |
| 4 | महाविकास आघाड़ी | कांग्रेस | 35 |
| 5 | शिवसेना (UBT) | 9 | |
| 6 | एनसीपी (शरद) | 7 | |
| कुल सीटें | 288 | ||
इन नतीजों से साफ है कि शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में महायुति को जनता का मजबूत समर्थन मिला है, जिसमें भाजपा सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है. वहीं महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस सबसे आगे रही, लेकिन कुल मिलाकर गठबंधन को महायुति के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करना पड़ा है. ये नतीजे आगामी नगर निगम और बड़े स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राज्य की राजनीति की दिशा और सियासी समीकरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं.
इस रिजल्ट को राज्य की अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और अन्य 28 नगर निगम चुनावों का सेमिफाइनल माना जा रहा है. राज्य चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि इन चुनावों के लिए मतदान 15 जनवरी और गिनती 16 जनवरी को होगी. कुल 2,869 सीटों पर मुकाबला होगा, जिसमें करीब 3.48 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे.

