उत्तर छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से घने कोहरे, शीतलहर और कड़ाके की ठंड का असर फसलों खासतौर पर सरसों पर पड़ रहा है। लगातार कोहरे के कारण वातावरण में अत्यधिक नमी बनी हुई है, जिसके चलते सरसों की फसल में फूल आने की अवस्था पर माहो (एफिड) एवं अन्य कीट-व्याधियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
साग-सब्जियों पर भी पाले का खतरा:- कोहरे और ठंड का असर केवल सरसों तक सीमित नहीं है, बल्कि साग-सब्जियों की खेती पर भी पालें का खतरा बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में सब्जियों की पत्तियां झुलसने लगी हैं, जिससे किसानों को नुकसान की आशंका है। मौसम की इस प्रतिकूल स्थिति को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग ने किसानों को फसलों को सलाह दी है कि वे फसलों को ठंड से बचाने के लिए खेतों में प्रकाश की व्यवस्था करें और बार-बार सिंचाई या स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं, जिससे तापमान का प्रभाव कम हो सके।
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