भारतीय वायु सेना (IAF) अपने हेलीकॉप्टर बेड़े को आधुनिक बना रही है। इस बड़े बदलाव के तहत, IAF अपने पुराने सोवियत-निर्मित Mi-35 अटैक हेलीकॉप्टरों को रिटायर करने की तैयारी कर रही है। इनकी जगह अब भारत में बने ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर लेंगे, जिन्हें खासतौर पर ऊंची पहाड़ी इलाकों में लड़ाई के लिए तैयार किया गया है।

‘उड़ने वाले टैंक’ का युग समाप्त

रक्षा सूत्रों के अनुसार, Mi-35 हेलीकॉप्टरों को पूरी तरह से 2030-2031 तक सेवा से हटा दिया जाएगा। यह भारत में रूसी हेवी अटैक हेलीकॉप्टरों की लगभग चार दशक की सेवा का अंत होगा। Mi-25 और Mi-35, जिन्हें उनकी भारी सुरक्षा और सैनिकों को ले जाने की क्षमता के कारण ‘उड़ने वाले टैंक’ कहा जाता था, 1980 और 1990 के दशक में भारतीय बेड़े में शामिल हुए थे। इनमें से कुछ हेलीकॉप्टरों को पहले ही रिटायर किया जा चुका है या मित्र देशों को उपहार में दिया गया है, जैसे कि अफगानिस्तान को दिए गए चार हेलीकॉप्टर। एक्सपर्ट का कहना है कि ये मजबूत तो हैं लेकिन भारी होने का कारण आधुनिक युद्धक्षेत्र, खासकर पहाड़ी इलाकों के लिए, उतने फुर्तीले और गुप्तनहीं हैं जितने होने चाहिए।

‘प्रचंड’ की बड़ी जिम्मेदारी

जैसे-जैसे सोवियत-युग के हेलीकॉप्टर रिटायर होंगे, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर मुख्य भूमिका निभाएगा। ‘प्रचंड’ एक मल्टी-रोल कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है जिसे भारत की खास भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। Mi-35 के विपरीत, ‘प्रचंड’ की जरूरत 1999 के कारगिल युद्ध के बाद महसूस की गई थी। उस युद्ध में यह बात साफ हो गई थी कि हमें ऐसे हथियारबंद हेलीकॉप्टर की जरूरत है जो बहुत ऊंचाई पर भी उड़ सकें और काम कर सकें।

  • आज, ‘प्रचंड’ दुनिया का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर (लगभग 16,400 फीट) की ऊंचाई पर उतर और उड़ान भर सकता है। यह क्षमता इसे सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण बनाती है।
  • ‘प्रचंड’ में आधुनिक एवियोनिक्स (हवाई जहाज के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम), रडार से बचने के लिए स्टील्थ फीचर्स और शक्ति इंजन लगा है, जो ऊंची जगहों पर बेहतर प्रदर्शन के लिए बनाया गया है।

इस रणनीति पर काम करेगी वायुसेना

  • Mi-35 के रिटायर होने से कोई खालीपन नहीं रहेगा। IAF के पास पहले से ही 22 बोइंग AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर हैं, जो 2019 से 2021 के बीच शामिल किए गए थे। अपाचे हेलीकॉप्टर भारी ‘टैंक-बस्टर’ के रूप में काम करते हैं और सटीक हमले करने में माहिर हैं।
  • भविष्य में, लड़ाकू हेलीकॉप्टरों का बेड़ा इन अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टरों और स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों का एक रणनीतिक मिश्रण होगा। इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए, रक्षा मंत्रालय ने 156 ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इनमें से 66 हेलीकॉप्टर भारतीय वायु सेना के लिए होंगे, जबकि बाकी 90 भारतीय सेना के एविएशन कोर में शामिल होंगे।
  • इस बड़े ऑर्डर की डिलीवरी 2028 से तेजी से शुरू होगी। यह समय-सीमा सुनिश्चित करती है कि जैसे-जैसे पुराने Mi-35 हेलीकॉप्टर धीरे-धीरे सेवा से हटेंगे, उनकी जगह तुरंत नए स्वदेशी हेलीकॉप्टर ले लेंगे। इससे भारत की रक्षा क्षमता मजबूत और आत्मनिर्भर बनी रहेगी।

क्यों बदल रहे हैं हेलीकॉप्टर?

Mi-35 हेलीकॉप्टर बहुत मजबूत थे और उन्हें ‘उड़ने वाले टैंक’ कहा जाता था। वे सैनिकों को ले जा सकते थे और दुश्मन पर हमला भी कर सकते थे। लेकिन, आज के युद्ध के तरीके बदल गए हैं। अब लड़ाई में फुर्ती और छिपकर हमला करने की क्षमता बहुत मायने रखती है। Mi-35 जैसे पुराने और भारी हेलीकॉप्टर ऊंची और पहाड़ी जगहों पर उतनी आसानी से नहीं उड़ पाते, जितनी जरूरत आज के समय में है। कारगिल युद्ध के बाद यह बात साफ हो गई थी कि हमें ऐसे हेलीकॉप्टर चाहिए जो बहुत ऊंचाई पर भी काम कर सकें।

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