छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही कन्वर्जन की घटनाओं के विरोध में 24 अक्टूबर को सर्व समाज द्वारा बुलाए गए महाबंद का व्यापक असर हुआ है. दवाओं, राशन, पेट्रोल, आवश्यक वस्तुओं के प्रतिष्ठान छोड़कर सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। समाज के हर वर्ग ने स्वस्फूर्त कन्वर्जन के विरुद्ध सर्व समाज के आह्वान पर अपना आक्रोश शांतिपूर्ण बंद के जरिए व्यक्त किया. प्रदेश के प्रत्येक गांव, कस्बे, तहसील एवं जिला मुख्यालय में बंद का अभूतपूर्व असर देखने को मिला. तहसील एवं जिला मुख्यालय में सर्व समाज एवं स्थानीय लोगों ने माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नाम स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कन्वर्जन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में ईसाई मिशनरी समूहों एवं भीम आर्मी द्वारा जनजातीय समाज पर किए गए हमले, जबरन शव दफन तथा प्रदेश में बढ़ते सुनियोजित सामाजिक विभाजन के विरोध एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। कन्वर्जन के विरूद्ध सर्वसमाज द्वारा बुलाए गए बंद को कलार समाज श्रीनामदेव समाज विकास परिषद् छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज, बस्तर चैम्बर ऑफ कॉमर्स जगदलपुर, साहू समाज, अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रीय महासभा, कन्फडेरशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स, उरांव समाज, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, धीवर समाज समेत सभी वर्ग ने अपना समर्थन देकर बंद को सफल बनाया।

प्रदेशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन

राजधानी रायपुर के मोती बाग चौक समेत प्रदेश के अलग-अलग जिला एवं तहसील मुख्यालयों एक बड़ी जन आक्रोश रैली का आयोजन किया गया। यहां लोगों ने कन्वर्जन हटाओ, देश बचाओं नारे के साथ कन्वर्जन करने वाली मिशनरियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग प्रशासन से की।

ज्ञापन सौंपकर कन्वर्जन पर कार्रवाई की मांग

सर्वसमाज की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि आमाबेड़ा की घटना कोई अपवाद या पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में इसी प्रकृति की घटनाएं घटित हो चुकी हैं। ईसाई मिशनरी गतिविधियों एवं उनसे जुड़े संगठनों द्वारा अवैध धर्मांतरण, सामाजिक हस्तक्षेप और स्थानीय परंपराओं के उल्लंघन की प्रवृत्ति लगातार सामने आ रही है, जिसका दुष्परिणाम पूरे सर्व समाज को भुगतना पड़ रहा है। इससे प्रदेश में सामाजिक संतुलन एवं सौहार्द गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सर्व समाज, छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेशव्यापी बंद एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सर्व समाज के नागरिक, जनजातीय प्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठन सहभागी बने। यह सहभागिता स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह विषय केवल स्थानीय नहीं, बल्कि प्रदेशव्यापी चिंता का विषय बन चुका है।अतः सर्व समाज, छत्तीसगढ़ की ओर से निम्नलिखित मांगें माननीय मुख्यमंत्री महोदय के समक्ष, आपके माध्यम से प्रस्तुत की जाती हैं-

1. राज्य में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को यथाशीघ्र प्रभावी एवं सख्ती के साथ लागू किया जाए, जिससे प्रलोभन, दबाव अथवा षड्यंत्रपूर्वक किए जा रहे धर्मांतरण पर नियंत्रण स्थापित हो सके। साथ ही पूरे प्रदेश में कन्वर्ज़न के माध्यम से उत्पन्न की जा रही सामाजिक वैमनस्य की परिस्थितियों को गम्भीरता से लेते हुए शासन-प्रशासन सख्ती बरतें, एवं दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे।2. कांकेर जिले में जनजातीय समाज पर हुए संगठित हमले के लिए जिम्मेदार भीम आर्मी से जुड़े तत्वों एवं कन्वर्टेड ईसाई समूहों के सभी आरोपियों के विरुद्ध कठोरतम धाराओं के अंतर्गत तत्काल कार्रवाई की जाए।

3. जनजातीय समाज के लोगों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने तथा शांतिपूर्ण ग्रामीणों पर असंगत एवं अत्यधिक पुलिस बल का प्रयोग करने के गंभीर आरोपों को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक, कांकेर इंदिरा कल्याण एलेसेला का शासन द्वारा किया गया स्थानांतरण पर्याप्त नहीं है। हमारी मांग है कि उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए तथा उनकी संदिग्ध भूमिका की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

4. शव दफन की प्रक्रिया के दौरान पक्षपातपूर्ण प्रशासनिक रवैया अपनाने तथा हिंदू समाज पर दुर्भावनापूर्ण एवं असत्य आरोप लगाने वाले एसडीएम ए. एस. पैकरा एवं तहसीलदार सुधीर खलखो को पदमुक्त किया गया है, लेकिन यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। हमारी मांग है कि उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए तथा उनकी संदिग्ध भूमिका की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

5. जनजातीय ग्रामीणों के विरुद्ध पक्षपातपूर्ण ढंग से की गई पुलिस एवं प्रशासनिक कार्रवाइयों को तत्काल निरस्त किया जाए, उन पर लगाए गए आपराधिक प्रकरणों एवं धाराओं को वापस लिया जाए, तथा हिंसा एवं बल प्रयोग से पीड़ित ग्रामीणों को समुचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

माननीय मुख्यमंत्री महोदय, सर्व समाज यह स्पष्ट करना चाहता है कि यह ज्ञापन किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि संविधान, कानून के शासन, जनजातीय आस्था और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए प्रस्तुत किया गया है। यदि शासन-प्रशासन द्वारा समय रहते दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, तो सर्व समाज को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में अपने आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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