नागौर/जोधपुर: पूर्व सांसद भानु प्रकाश मिर्धा का गुरुवार को जोधपुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया. वे 72 वर्ष के थे. उनके निधन से मिर्धा परिवार ही नहीं, बल्कि नागौर और राजस्थान की राजनीति में शोक की लहर है. मिर्धा अपने पीछे भरा पूरा परिवार और एक लंबी राजनीतिक विरासत छोड़ गए हैं. भानु प्रकाश मिर्धा किसान केसरी कहे जाने वाले नाथूराम मिर्धा के पुत्र थे. पिता के निधन के बाद वर्ष 1997 में नागौर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने पहली बार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर संसद पहुंचे. वे 11वीं लोकसभा (1997–1998) के सदस्य रहे.उनका अंतिम संस्कार जोधपुर में चौपासनी रोड मिर्धा फार्म हाउस पर किया गया.

चाचा-भतीजा मुकाबले से बदली नागौर की राजनीति : 1997 का नागौर उपचुनाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. कांग्रेस ने इस चुनाव में नाथूराम मिर्धा के भाई एवं वरिष्ठ नेता राम निवास मिर्धा को उम्मीदवार बनाया था, जबकि भानु प्रकाश मिर्धा भाजपा के उम्मीदवार बने. यह चुनाव ‘चाचा बनाम भतीजा’ के रूप में चर्चित रहा. इस मुकाबले में भानु प्रकाश मिर्धा की जीत ने नागौर में भाजपा की राजनीतिक जमीन मजबूत की और मिर्धा परिवार की राजनीति में स्थायी विभाजन की स्थिति बनी.

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