नई दिल्ली: बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खुली चिट्ठी भेजकर दावा किया है कि अगले कुछ महीनों में चीन, पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में अपनी सेना तैनात कर सकता है। बलूच नेता ने पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ रही इस तरह का सामरिक मेलजोल को बहुत ही खतरनाक बताया है और एक्स पर पोस्ट करके वह चिट्ठी भी साझा की है। मीर यार बलूच का कहना है कि समय आ गया कि इस समस्या को हमेशा के लिए जड़ से उखाड़ फेंका जाए।

‘समस्या को जड़ से मिटाने का वक्त’

बलूच नेता ने कहा है कि बलूचिस्तान ने दशकों तक पाकिस्तान के नियंत्रण में दमन झेला है, जिसमें राज्य-प्रायोजित हिंसा और मानवाधिकारों का उल्लंघन भी शामिल है। उन्होंने लिखा है, ‘बलूचिस्तान के लोगों ने पिछले उनहत्तर वर्षों से पाकिस्तानी कब्जे, सरकार प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को झेला है। अब वक्त आ गया है कि इस बढ़ती जा रही समस्या को जड़ से मिटा दिया जाए, ताकि हमारे मुल्क में स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित हो सके।’

बलूच नेता ने सीपीईसी को लेकर चेताया

बलूच नेता ने इस बात की ओर इशारा किया है कि चीन और पाकिस्तान, चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर( CPEC ) के फाइनल स्टेज की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, जो कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। बलूच नेता का कहना है, ‘बलूचिस्तान गणराज्य पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते सामरिक मेलजोल को बहुत ही खतरनाक रूप में देखता है। हम चेतावनी देते हैं कि चीन, पाकिस्तान के साथ मिलकर चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को अंतिम चरण की ओर बढ़ा लिया है।’

चीन तैनात कर सकता है अपनी सेना

इसी के साथ चीन की मिलिट्री की तैनाती की आशंका जताते हुए उन्होंने खत में लिखा है, ‘अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रत शक्तियों को और मजबूत नहीं किया गया और अगर लंबे वक्त से चले आ रहे पैटर्न के अनुसार उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, तो यह मुमकिन है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर दे।’ उन्होंने स्पष्ट तौर पर भयानक तस्वीर पेश करते हुए आशंका जताई है, कि 6 करोड़ बलूचों की सहमति के बिना बलूचिस्तान की जमीन पर चीन की सेना की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सराहा

बता दें कि चीन और पाकिस्तान ने लगातार इन आरोपों का खंडन किया है कि सीईपीसी के बहाने उनका कोई गुप्त सैन्य एजेंडा भी है। वह यही सफाई देते रहे हैं कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से आर्थिक है। हालांकि, भारत ने इसका लगातार विरोध किया है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जो भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भी चुनौती है। अपनी चिट्ठी में बलूच नेता ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी सेना और वहां छिपे आतंकी संगठनों के खिलाफ भारत की साहसिक और निर्याणक सैन्य कार्रवाई की जमकर सराहना भी की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के लिए साहस और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है।

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