अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव के बीच वेनेजुएला ने एक के बाद एक ऐसे कदम उठाए हैं, जिन्होंने अमेरिका की रणनीति को उलझा दिया है. एक तरफ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिकी कंपनियों को खुले तौर पर वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में निवेश का ऑफर दे दिया है, तो दूसरी तरफ रूस ने उस तेल टैंकर को बचाने के लिए बड़ा कूटनीतिक दांव चल दिया है, जिसे अमेरिकी नेवी पकड़ने की कोशिश कर रही है. रूस के इस कदम से अमेरिका जहाज को छूने की भी कोशिश नहीं करेगा. इसी बीच चीन ने भी वेनेजुएला के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करने का संकेत दिया है.

वेनेजुएला ने अमेरिका को क्या ऑफर दिया?

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने स्पेनिश पत्रकार इग्नासियो रामोनेत को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि अगर अमेरिका को वेनेजुएला का तेल चाहिए, तो वह निवेश के लिए तैयार हैं. मादुरो ने कहा कि अमेरिकी निवेश का रास्ता खुला है, उनकी ही शर्तों पर ही हम निवेश को तैयार हैं. इस बयान को अमेरिका पर दबाव और साथ ही बातचीत का संकेत माना जा रहा है.

टैंकर को लेकर रूस ने किया खेल

अमेरिका जिस तेल टैंकर को पकड़ने की कोशिश कर रहा था, अब वह मामला और पेचीदा हो गया है. ‘बेला 1’ नाम का यह टैंकर अब रूस के आधिकारिक समुद्री रजिस्टर में शामिल कर लिया गया है. इसका नाम बदलकर ‘मारिनेरा’ कर दिया गया है और इस पर रूस का झंडा लगा दिया गया है. इसका होम पोर्ट सोची दिखाया गया है. अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, जिस देश का झंडा जहाज पर होता है, वह उस देश की सुरक्षा में माना जाता है. इसी आधार पर जहाज के क्रू ने अमेरिकी कोस्ट गार्ड को रेडियो पर बताया कि यह अब रूसी जहाज है. जहाज के किनारे रूस का झंडा भी पेंट किया गया है. यानी अगर अब इस जहाज को अमेरिका ने पकड़ा तो वह सीधे रूस से पंगा लेना जैसा होगा.

जहाज के पीछे क्यों पड़ा था अमेरिका?

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जब कोस्ट गार्ड ने करीब दो हफ्ते पहले इस टैंकर को रोका था, तब उस पर कोई वैध राष्ट्रीय झंडा नहीं था. ऐसे में वह ‘स्टेटलेस’ माना गया और उसे रोका जा सकता था. जहाज उस समय वेनेजुएला के बंदरगाह से तेल लेने जा रहा था, लेकिन उसने यू टर्न ले लिया और तब से लगातार अमेरिकी निगरानी से बचता रहा है. अमेरिका के पास इस जहाज को जब्त करने का कोर्ट वारंट भी है. आरोप है कि यह जहाज पहले ईरानी तेल की तस्करी में शामिल रहा है, जिससे आतंकवाद को फंडिंग होती है. हालांकि रूस की ओर से रातों-रात झंडा बदलना कानूनी रूप से कितना मजबूत है, इस पर खुद अमेरिकी विशेषज्ञ भी सवाल उठा रहे हैं.

रूस का राजनयिक दबाव

रूस ने इस पूरे मामले में अमेरिका को औपचारिक राजनयिक पत्र भेजकर कहा है कि वह इस टैंकर का पीछा करना बंद करे. यह पत्र न्यू ईयर ईव पर अमेरिकी विदेश विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी काउंसिल को भेजा गया. यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत चल रही है. यह सब ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका पहले ही वेनेजुएला के तेल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों और चार टैंकरों पर नए प्रतिबंध लगा चुका है.

चीन भी मैदान में उतरा

इसी बीच चीन के विशेष दूत किउ शियाओची ने वेनेजुएला की राजधानी कराकास में राष्ट्रपति मादुरो से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सहयोग और बहुध्रुवीय दुनिया के साझा विजन पर जोर दिया. चीन ने साफ किया कि वह वेनेजुएला को सिर्फ कारोबारी साझेदार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक सहयोगी के रूप में देखता है.

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