अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अब भारत को भी घुडक़ाना शुरू कर दिया है। बेशक वह भारत में ‘वेनेजुएला प्रयोग’ को दोहराने का दुस्साहस नहीं कर सकते, क्योंकि वह भारत की चौतरफा ताकत को अच्छी तरह जानते हैं। भारत की ईमानदारी और प्रतिबद्धताओं को भी समझते हैं। भारत एक प्रमाणित परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र है, अमरीका से अधिक यह कौन जानता है, क्योंकि अमरीका ने भारत के साथ असैन्य परमाणु करार कर रखा है। बहरहाल राष्ट्रपति ट्रंप का नया बयान आया है-‘दरअसल प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इनसान हैं। वे जानते हैं कि मैं इससे (रूस से तेल खरीद) खुश नहीं हूं और मुझे खुश रखना जरूरी है। यदि रूस से तेल खरीद जारी रही, तो भारत पर बहुत जल्दी और टैरिफ लग सकते हैं। वह भारत के लिए ठीक नहीं होगा।’ गौरतलब यह है कि भारत अप्रैल, 2025 में रूस से 8.6 मिलियन टन कच्चा तेल खरीदता था, जो नवंबर तक घट कर 7.7 मिलियन टन हो गया। भारत अमरीका से भी करीब 3 मिलियन टन तेल खरीदता है। अमरीका की तुलना में रूस से तेल खरीद आज भी अधिक है। भारत ने किसी दबाव में तेल खरीद को कम नहीं किया, यह उसकी जरूरतों के मुताबिक है। तेल भंडारों और क्षमताओं को लेकर अमरीका का स्थान बहुत नीचे है। वेनेजुएला में सबसे अधिक प्रमाणित 303 अरब बैरल तेल के भंडार हैं और वह आज भी सबसे बड़ा सप्लायर है। उसके बाद सऊदी अरब और ईरान सबसे अधिक तेल बेचते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की पूरी रणनीति तेल कारोबार पर वर्चस्व स्थापित करने की है, जिसका विरोध अमरीका में ही किया जा रहा है। पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने वेनेजुएला हमले और वहां के राष्ट्रपति को अगवा करके अमरीका लाने के ऑपरेशन को लेकर ट्रंप के खिलाफ आक्रामक बयान दिए हैं। उन्हें ‘राजनीतिक’ भी माना जा सकता है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ महाभियोग लाने पर भी चर्चा छिड़ चुकी है। डेमोक्रेट्स और टं्रप की पार्टी के सांसद अपने ही राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाकर उन्हें पद से हटाने की राजनीति में जुट गए हैं।

जहां तक टैरिफ का मामला है, वह अमरीकी अदालत के विचाराधीन है, लिहाजा ट्रंप नए टैरिफ नहीं थोप सकते। अलबत्ता अमरीकी राष्ट्रपति कमोबेश भारत को घुड़कियां देने से बाज जरूर आएं। यदि उन्होंने घोषित 50 फीसदी से अधिक टैरिफ थोपने का कोई फैसला लिया, तो अमरीकी कांग्रेस (संसद) उसे खारिज कर सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप बड़बोले नेता हैं, लिहाजा उनकी टिप्पणियों पर हर बार पलटटिप्पणी भारत करे, ऐसा संभव नहीं है और न ही भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को ट्रंप के बयानों की चिंता करनी चाहिए। भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ थोपने के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर 8 फीसदी से अधिक रही है। सभी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और प्रमुख रेटिंग एजेंसियों के आकलन हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 7 फीसदी से अधिक रहेगी। टैरिफ के बावजूद भारत की जीडीपी 375 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है और भारत विश्व में सबसे तेज गति से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था है। यह तथ्य अमरीका भी मानता है कि भारत की अर्थव्यवस्था अमरीकी अर्थव्यवस्था से कई गुना तेज गति से बढ़ रही है। बेशक अमरीका 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की सर्वोच्च अर्थव्यवस्था है। अमरीका वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को अगवा करके अपने अदालती कटघरे तक ला सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप कोलंबिया, क्यूबा, ग्रेनेडा, ग्रीनलैंड, मैक्सिको आदि छोटे और आर्थिक रूप से विपन्न देशों को धमकियां दे सकते हैं कि उनके राष्ट्राध्यक्षों का अंजाम मादुरो से भी बदतर होगा। भारत इस संदर्भ में ‘अपवाद’ है। ट्रंप कमजोर देशों पर नार्को आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप लगाकर अमरीकी अदालत में केस चला सकते हैं, लेकिन भारत ऑटोमोबाइल, मोबाइल, चावल, चीनी, आईटी, दूध, गेहूं आदि के सर्वोच्च देशों में एक है। विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लिहाजा राष्ट्रपति को ऐसे देश को घुडक़ाने से पहले कई बार सोचना चाहिए।

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