नई दिल्ली. कल्पना कीजिए कि आपके WhatsApp पर एक मैसेज आता है कि RTO चालान बकाया है. आप घबराकर फाइल खोलते हैं और कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से लाखों रुपये गायब हो जाते है. देहरादून में एक शख्स के साथ यही हुआ, जब एक फर्जी e-RTO चालान ने उसकी सालों की कमाई पर हाथ साफ कर दिया. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि बढ़ते साइबर फ्रॉड का एक उदाहरणहै. ठग अब चालान का डर दिखाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं. सवाल यह है कि ठगों का अगला मैसेज कहीं आपके फोन पर तो नहीं आने वाला?
पिछले साल 27 दिसंबर को देहरादून में एक 54 साल के व्यक्ति के साथ बड़ा साइबर फ्रॉड हुआ है. उन्हें WhatsApp पर एक अज्ञात नंबर से मैसेज आया, जिसमें RTO Challan.APK नाम की फाइल थी। उन्हें लगा कि ये उनके वाहन का ट्रैफिक चालान है, इसलिए उन्होंने फाइल खोल ली. लेकिन फाइल खोलते ही उनके फोन में मालवेयर घुस गया और बैंक अकाउंट से कई ट्रांजैक्शन में कुल 3.6 लाख रुपये निकल गए. जब तक उन्हें पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
मामले की जांच कर रही है पुलिस
जब तक उन्हें धोखाधड़ी का अहसास हुआ, तब तक पैसा खाते से जा चुका था. इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. साइबर सेल की टीम आरोपियों का पता लगाने में जुटी है और यह जांच की जा रही है कि ठगों ने किस तरह मैलवेयर के जरिए मोबाइल का एक्सेस हासिल किया.
किसी भी अनजान लिंक या फाइल को न खोलें
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि APK फाइल्स के जरिए फोन में खतरनाक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है, जिससे बैंकिंग ऐप, OTP, पासवर्ड और निजी डेटा ठगों तक पहुंच जाता है. यही वजह है कि सरकार और साइबर एजेंसियां बार-बार चेतावनी देती हैं कि WhatsApp या SMS पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक या फाइल को न खोलें. पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि RTO या किसी सरकारी विभाग की ओर से आने वाला कोई भी चालान आमतौर पर SMS या आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भेजा जाता है, न कि WhatsApp पर APK फाइल के रूप में. अगर किसी को शक हो, तो सीधे परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर चालान की जानकारी जांचें.

