BJP-AIMIM Alliance In Maharashtra Akot: महाराष्ट्र की सियासत में बीते दिनों अप्रत्याशित घटना हुई. अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस से तो अकोट में भाजपा ने ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाया था. हालांकि, बाद में दोनों जगह गठबंधन से भाजपा ने खुद को अलग कर लिया. अब दोनों जगहों पर ऐसा क्यों और कैसे हुआ, इसका जवाब खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया है.

महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव को लेकर हलचल जारी है. मुंबई का मेयर कौन होगा और किस पार्टी का होगा, सबको इसका इंतजार है. इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. महाराष्ट्र के अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन क्यों और कैसे हुआ, आखिर अकोट में कैसे भाजपा ने ओवैसी की एआईएमआईएम से हाथ मिलाया? इन सभी सवालों का देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया है. उन्होंने बताया है कि आखिर यह अनोखा और अप्रत्याशित गठबंधन कैसे हुआ और इसमें किसकी गलती थी. देवेंद्र फडणवीस ने अंबरनाथ और अकोट दोनों जगह के लिए अलग-अलग क्रोनोलॉजी दी है. हालांकि, उन्होंने माना कि गठबंधन करना गलत था.

अकोट में भाजपा-ओवैसी गठबंधन क्यों?

अकोट में भाजपा-एआईएमआईएम गठबंधन पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘अकोट एक बहुत छोटी सी जगह है. अकोट नगर पालिका में 17 हजार वोटर हैं. यहां हमारे नगर अध्यक्ष चुनकर आए हैं. नीचे में हमारी मेजॉरिटी नहीं थी. अभी महाराष्ट्र में होता है कि पोस्ट पोल आप साथ में आकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. इसलिए हमने अजित गुट वाली एनसीपी के साथ अलांयस किया. हमें पता नहीं था कि एनसीपी ने ऑलरेडी एमआईएम के साथ अलांयस किया हुआ है. जैसे ही एनसीपी के साथ हमारा अलायंस हुआ, टेक्नीकली ये एमआईएम वाले भी हमारे अलांयस पार्टनर बन गए. बड़ा हो हल्ला हुआ. यह बहुत छोटी सी जगह है. यह बात हमारे तक पहुंचती भी नहीं. जैसे ही हमें पता चला हम उस अलांयस से बाहर निकल गए. हम अपने वहां के एमएलए को सस्पेंशन का नोटिस भेज दिया.’

अंबरनाथ में कैसे हुआ भाजपा-कांग्रेस गठबंधन?

अंबरनाथ में कांग्रेस और भाजपा गठबंधन पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘जहां तक कांग्रेस से अलांयस का सवाल है, वह भी गलत प्रकार का नैरेटिव है. अंबरनाथ में हमारा अध्यक्ष चुनकर आए. नीचे का मैंडेट हमारा थोड़ा गड़बड़ था. हम भी थे और शिंदे वाली शिवसेना थी. हमारा मानना था कि अंबरनाथ में भी भाजपा और शिंदे वाली शिवसेना का वहां गठबंधन हो, क्योंकि ये हमारे पार्टनर है. मगर उस शहर में लोकल लेवल पर शिवसेना और भाजपा नेताओं में दुश्मनी है. लोकल लेवल पर शिवसेना और भाजपा नेता दोनों अपोनेंट हैं. लोकल लेवल पर हमें ये चीजें पता नहीं चलती. इसलिए दोनों साथ नहीं गए. ऐसे में लोकल लेवल के भाजपा वालों ने कांग्रेस को तोड़ने का फैसला किया. जैसे ही कांग्रेस को यह पता चला उन्होंने अपने नेताओं को पार्टी से निकाल दिया. उनके पता था कि उनके लोग भाजपा में जा रहे हैं. इसके बाद कांग्रेस ने यह बवाल खड़ा किया कि देखो भाजपा ने कांग्रेस के साथ अलांयस किया, इसलिए हमने पार्षदों को निकाल दिया. मगर हमारा कोई अलांयस नहीं हुआ था. उन्होंने पार्टी से निकाला और हमने उनके लोगों को पार्टी में लिया. यह सब लोकल लेवल पर हुआ. मेरा मानना है कि हमारा पोस्ट पोल अलांयस भी शिवसेना के साथ ही होना चाहिए था.’

अंबरनाथ परिषद में क्या हुआ था?
अंबरनाथ में शिंदे की शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ था. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और एनसीपी के अजित पवार के समर्थन से अंबरनाथ नगर परिषद में बहुमत हासिल कर लिया. अंबरनाथ ठाणे जिले में स्थित है, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह जिला भी माना जाता है. हाल ही में हुए नगर परिषद चुनावों में भाजपा ने अंबरनाथ में शिवसेना को हराकर वहां का शासन खत्म कर दिया. हालांकि शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन भाजपा ने एक अप्रत्याशित गठबंधन बनाकर नगर परिषद अध्यक्ष पद हासिल कर लिया और बहुमत भी बना लिया. 59 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को 23 सीटें मिलीं, भाजपा को 16, कांग्रेस को 12 और एनसीपी (अजित पवार गुट) को 4 सीटें मिलीं. भाजपा (16), कांग्रेस (12) और एनसीपी (4) ने मिलकर कुल 32 सीटें हासिल कर लीं, जिससे बहुमत का आंकड़ा पार हो गया. इसके साथ ही शिंदे गुट की शिवसेना (23 सीटें) विपक्ष में चली गई. हालांकि, बाद में कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को निकाल दिया, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए.

अकोट में क्या हुआ था?
बीजेपी ने अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ गठबंधन किया था. अकोट में हुए हालिया नगर परिषद चुनावों में बीजेपी की माया धुले ने मेयर पद तो जीत लिया, लेकिन 35 सदस्यीय नगर पालिका में पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया. अकोट में कुल 35 सीटों में से 33 पर नतीजे घोषित हुए, जिनमें बीजेपी को 11 सीटें ही मिलीं. बहुमत के आंकड़े से दूर रहने के कारण बीजेपी ने अपने नेतृत्व में एक नया गठबंधन खड़ा किया, जिसे ‘अकोट विकास मंच’ नाम दिया गया. इस अकोट विकास मंच में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यहां 5 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी AIMIM बीजेपी की सहयोगी बन गई. इसके अलावा इस मंच में शिंदे गुट की शिवसेना, अजित पवार की एनसीपी, शरद पवार की एनसीपी और बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल थी. इस नए गठबंधन को औपचारिक रूप से अकोला जिला मजिस्ट्रेट के पास रजिस्टर करा दिया गया. अकोट नगर पालिका में इस नए समीकरण के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास कुल 25 सदस्यों का समर्थन हो गया, जबकि कांग्रेस की 6 सीटें और वंचित बहुजन अघाड़ी की 2 सीटें विपक्ष में चली गई . इस तरह सत्ता की चाबी बीजेपी के हाथ में आ गई. बाद में अकोट में भाजपा और ओवैसी की पार्टी के बीच गठबंधन टूट गया. महाराष्ट्र में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते विधायक प्रकाश भारसाकले को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

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