समाज शास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे अनेक सर्वे बता रहे हैं कि देश में पोर्न (सैक्स सामग्री) देखने की लत यानी पोर्न एडिक्शन सभी वर्गों में तेजी से बढ़ रही है। पोर्न देखने की आदत जब इस हद तक पहुंच जाए कि पर्सनल और प्रोफैशनल लाइफ इससे प्रभावित होने लगे तो समझ जाना चाहिए कि पोर्न एडिक्शन की शुरुआत हो चुकी है। यह एक खतरनाक बुरी आदत है और इसके कारणों और दुष्प्रभावों को जानना जरूरी है। हर वक्त पोर्न के ख्यालों में खोने की वजह से एडिक्शन का शिकार इंसान न तो कोई नई बात सोच पाता है और न ही कुछ प्लान कर पाता है। उसके आसपास के लोग इसे आदत का बदलाव समझ कर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और वह इंसान एडिक्शन में डूबता चला जाता है।

पोर्न एडिक्शन और सैक्स एडिक्शन दोनों अलग बातें हैं। जहां सैक्स एडिक्शन का असर सैक्सुअल लाइफ को प्रभावित करता है, वहीं पोर्न एडिक्शन जिंदगी के कई क्षेत्रों को प्रभावित करता है। अक्सर पोर्न देखने वाले रात में देर तक पोर्न देखते हैं और इस वजह से बाकी दिन सुस्त रहते हैं। न उनके काम का कोई वक्त होता है, न आराम का-किसी काम में मन न लगना, शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान होने के बावजूद पोर्न देखना जारी रखना, ज्यादा-से-ज्यादा बार मैस्टरबेट करना, अपने पार्टनर के प्रति अरुचि, सैक्सुअल बिहेवियर में भारी बदलाव, जैसे एग्रैसिव हो जाना, पार्टनर की भावनाओं की कद्र न करना, पोर्न को दुनिया की हर परेशानी और टैंशन से दूर भागने के टूल की तरह इस्तेमाल करना। यह एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक विकार है, जिसको ठीक करना आसान नहीं होता। ऐसा नहीं है कि पोर्न देखने की लत सिर्फ उम्रदराज लोगों में ही हो सकती है, 9 से 15 साल तक के बच्चों पर इस तरह का एडिक्शन तेजी से कब्जा करता है। तकरीबन 9 साल की उम्र से ही मर्दानगी लाने वाला हॉर्मोन बनने लगता है और इसी के चलते ऐसी चीजों को लेकर उत्सुकता बढऩे लगती है। हजारों की संख्या में स्कूली और कॉलेज जाने वाले छात्र भी इस लत का शिकार हो रहे हैं, यह एक बड़ी सामाजिक चिंता है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि काम के दौरान पोर्न देखना अब आम हो गया है, क्योंकि ऑनलाइन पोर्न तक पहुंच आसान हो गई है। एक लोकप्रिय डिजिटल लाइफस्टाइल पत्रिका के लिए किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण से यह पता चला है कि 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने बताया कि उन्होंने ऑफिस में काम करते हुए पोर्न देखी है। पोर्न का चलन पश्चिमी देशों से आया है। इन देशों में पोर्न इंडस्ट्रीज अरबों डॉलर का व्यापार करती हैं। कुछ दशकों से भारत में भी पोर्न वीडियो देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह भारतीय संस्कृृति पर एक बड़ा प्रहार है।

पोर्न देखने से हमारी निजी जिंदगी को नुकसान पहुंचता है। एक रिसर्च के अनुसार, अधिक पोर्न वीडियो देखने से दिमाग सिकुडऩे लगता है। पोर्न देखने वालों में एक अलग तरह की उत्तेजना पैदा होती है। मनोवैज्ञानिक मत है कि पोर्न देखकर सैक्स करने से सही ऑर्गज्म नहीं मिलता। ऑक्सीटोसिन एक लव हार्मोन है, जो पुरुष और महिलाओं दोनों को एक-दूसरे को आकर्षित करने में मदद करता है। पोर्न फिल्मों में जिस तरह से सैक्स करना दिखाया जाता है, उससे ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज नहीं होता। इससे प्यार की फीलिंग नहीं आती। कई बार पुरुष अपनी फीमेल पार्टनर से बिल्कुल पोर्न वीडियोज में दिखाए जाने वाले एक्ट करने की डिमांड करते हैं, जो सबके लिए करना आसान नहीं होता। इससे शादीशुदा रिश्ते खराब होने लगते हैं।
न्यूरोसाइंटिस्ट कहते हैं कि बहुत ज्यादा पोर्न देखने से मनोविकार की स्थिति पैदा हो सकती है। पोर्न देखने की लत आपको अकेला कर देती है। समाज और परिवार से दूर निकलकर आप हमेशा अकेलापन खोजते हैं। ऐसे लोग पोर्न देखने के मजे में इतने डूब जाते हैं कि उन्हें परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ रहना खास अच्छा नहीं लगता। पोर्न देखने की टाइमपास आदत भी अति के बाद लत की शक्ल ले लेती है और जब तक इसकी गिरफ्त में होने का अहसास होता है, आसपास काफी कुछ तहस-नहस हो चुका होता है। क्या इस लत से बचना समाज के लिए संभव होगा?-डा. वरिन्द्र भाटिया

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