नई दिल्‍ली. 1 फरवरी को जब वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण साल 2026 का बजट पेश करेंगी, तो सबसे ज्‍यादा निगाह स्‍टार्टअप सेक्‍टर पर होगी. देश में स्‍टार्टअप के लिए माहौल तेजी से बन रहा है और इस सेक्‍टर को पूरी उम्‍मीद है कि इस पर सरकार का फोकस उसी पर होगा. अनुमान है कि सरकार बजट में तगड़े इंसेंटिव के साथ बैंकों से आसान लोन और नियमों का सरल अनुपालन जैसी सुविधा मिल सकती है. इससे भारतीय स्‍टार्टअप सेक्‍टर को लॉन्‍ग टर्म में तेज ग्रोथ मिल सकती है.

स्‍टार्टअप उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार की तमाम योजनाओं के बावजूद इसे लागू करने में अभी भी बड़ा गैप है. खासकर स्‍टार्टअप को फंड जुटाने में आज भी सबसे बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा टैक्‍स के नियमों, नियामकीय अनुपालन जैसे मुद्दों पर युवा स्‍टार्टअप को आज भी दिक्‍कत आ रही है. कई स्‍टार्टअप के फाउंडर्स का कहना है कि उन्‍हें घरेलू उत्‍पादन को मजबूत करने के लिए वास्‍तविक वाहन बिक्री से जुड़ी सब्सिडी दी जाए. इस तरह की सब्सिडी बढ़ाने और वाहनों की बिक्री के आधार पर समर्थन देने से विनिर्माण की क्षमता काफी मजबूत हो सकती है. ऐसा होता है तो स्‍टार्टअप के लिए उत्‍पादन बढ़ाने और तकनीक में निवेश करने में आसानी होगी.

बैंकों के नियम बन रहे बाधा
स्‍टार्टअप के फाउंडर्स का कहना है कि आज उनके लिए सरकार की ओर से जारी क्रेडिट वाली योजनाओं तक पहुंचना आसान नहीं है. सरकार CGTMSE, मुद्रा और PMEGP जैसी योजनाएं स्‍टार्टअप की फंडिंग के लिए चलाती है, लेकिन बैंकों और एनबीएफसी की ओर से रखी जाने वाली कोलैटरल की शर्तों की वजह से इसका फायदा नहीं मिल पाता है. लिहाजा स्‍टार्टअप सेक्‍टर ने सरकार से अपील की है कि वह कर्ज बांटने वाले संस्‍थानों को स्‍पष्‍ट गाइ‍डलाइन जारी करे, ताकि लोन के गारंटी मैकेनिज्‍म को पूरी तरह लागू किया जा सके.

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