बार-बार भारत के हाथों मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्तान के शासक अपने पाले हुए आतंकवादियों के जरिए भारत विरोधी अभियान जारी रख कर लगातार भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बयान में कहा है कि ‘‘दशकों से सेना की सहायता से पाकिस्तान सरकार अपने देश के विभिन्न शहरों में खुलेआम आतंकवादियों के प्रशिक्षण शिविर चलाती आ रही है तथा भारत के विरुद्ध आतंकवाद को एक नीति के रूप में इस्तेमाल कर रही है।’’ 

10 जनवरीको ‘साम्बा’ पुलिस ने ‘पलुरा’ क्षेत्र में पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा गिराई गई हथियारों की खेप बरामद की। इसमें चीन निर्मित ‘हाइली एक्सप्लोसिव हैंड ग्रेनेड’, 9 एम.एम. पिस्तौल के 16 कारतूस, मैगजीनों के साथ 3 विदेशी पिस्तौल आदि शामिल थे। इस घटना को सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश के रूप में देखते हुए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। ताजा सूचनाओं के अनुसार पाकिस्तान लगातार सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में ड्रोन भेज रहा है। गत 12 जनवरी को एक पाकिस्तानी  ड्रोन ने ‘जैसलमेर’ के ‘रामगढ़’ में संवेदनशील क्षेत्र में एक घंटे तक उड़ान भरी। इसी प्रकार 13 जनवरी को भी ‘जम्मू-कश्मीर’ के ‘राजौरी’ जिले के ‘केरी’ सैक्टर में पाकिस्तान की ओर से उड़ाया गया ड्रोन देखा गया। 

इसी पृष्ठभूमि में सेना प्रमुख जनरल ‘उपेंद्र द्विवेदी’ ने 13 जनवरी को कहा कि ‘‘पाकिस्तान में नियंत्रण रेखा के पार अभी भी सक्रिय 8 से 10 के बीच आतंकवादी शिविरों में लगभग 150 आतंकवादी मौजूद हैं।’’
उनका यह भी कहना है कि ‘‘वर्तमान युद्धों में राकेट, मिसाइलों और ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए भारत को भी चीन और पाकिस्तान की भांति राकेट व मिसाइल फोर्स तैयार करने के अलावा ड्रोनों का जखीरा बढ़ाना होगा।’’
पाकिस्तान से ड्रोनों के जरिए हथियार, ड्रग्स और जाली करंसी भेजी जाती है। हथियारों में सबसे अधिक असाल्ट राइफलें ए.के. 47 और ए.के. 56 बरामद हुई हैं। इनके अलावा सुरक्षा बलों द्वारा तलाशी के दौरान विभिन्न स्थानों से आई.ई.डी. और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की जा रही है। 

जहां भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा ऐसे हालात के बीच पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम किया जा रहा है, वहीं जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों के मददगारों और विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे देशद्रोहियों का पता लगाकर उनके विरुद्ध कार्रवाई भी की जा रही है।  
इसी सिलसिले में जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त विभिन्न सरकारी विभागों के 85 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है और अब 13 जनवरी, 2026 को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवादियों से संबंध रखने के संदेह में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया है।  इनमें अध्यापक, प्रयोगशाला टैक्नीशियन, सहायक लाइनमैन, वन विभाग कर्मी तथा स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी शामिल हैं। भारी बेरोजगारी के दौर में सरकारी नौकरी पाकर देश का आभार मानने की बजाय देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त ऐसे लोग न जाने अपने ही कितने लोगों को मरवा चुके होंगे। 

सुरक्षा बलों द्वारा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान सामने आए उक्त मामलों से स्पष्टï है कि पाकिस्तान सरकार भारत में माहौल खराब करने पर किस कदर आमादा है। इसी के दृष्टिïगत केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन ने 14 जनवरी को जम्मू में जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा सुरक्षा बलों के प्रमुखों के साथ सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के विषय में चर्चा की है। उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा भी कुछ समय पूर्व एक सुरक्षा समीक्षा बैठक में जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद और उसके समर्थकों को जड़ से खत्म करना अपनी प्राथमिकता बता चुके हैं और सुरक्षा बल ऐसा कर भी रहे हैं, परंतु आतंकवादियों और उनके समर्थकों को खोज कर उनका सफाया करने के काम में और तेजी लाने की आवश्यकता है

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