सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच कर रही सीबीआई के अधिकारी तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए पश्चिम बंगाल पहुंचे थे और उन्हें राज्य पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया…

पश्चिम बंगाल देश के लिए ऐसा राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। इससे होने वाले राष्ट्रव्यापी नुकसान की ममता बनर्जी सरकार को परवाह नहीं है। ममता बनर्जी का तौर-तरीका ऐसा बन चुका है मानो पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा नहीं होकर एक स्वतंत्र देश हो। ममता किसी न किसी मुद्दे पर केंद्र सरकार से टकराती रही हैं। एक भी मौका केंद्र से टकराव का नहीं छोड़ती है और फिर खुद ही लोकतंत्र खतरे में है का नारा देकर सिर पर आसमान उठा लेती है। नया मामला प्रवर्तन निदेशालय के छापे की कार्रवाई का है। ईडी ने पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट पहुंच गई। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ममता बनर्जी ने आई-पैक के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर ईडी की छापेमारी के संबंध में संघीय एजेंसी के खिलाफ दो कोलकाता और बिधाननगर पुलिस ने औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई। ममता बनर्जी ने ईडी की छापेमारी के खिलाफ कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के साथ विरोध मार्च निकाला। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ईडी चुनाव से पहले उनकी पाटी तृणमूल कांग्रेस के संवेदनशील दस्तावेज जब्त कर राजनीतिक प्रतिशोध कर रही है। पुलिस ने ममता बनर्जी की शिकायत पर ईडी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी। यह मुद्दा कलकत्ता हाईकोर्ट तक गया। कलकत्ता हाइकोर्ट ने रेड मामले में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी।

पार्टी ने आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी ईडी ने आईटी हेड प्रतीक जैन के ऑफिस पर रेड मारकर कुछ कागजात जब्त किए थे। एजेंसी का कहना था कि पार्टी दफ्तर से कुछ भी जब्त नहीं किया है। कोर्ट ने कहा, जब ईडी ने कुछ भी जब्त न करने की बात की है, तो अब इस मामले पर सुनवाई के लिए कुछ नहीं बचता है। याचिका खारिज कर दी। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर भारतीय न्याय संहिता के तहत 17 अपराधों की सीबीआई जांच की मांग की। याचिका में ईडी ने आरोप लगाया है कि सीएम ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने ईडी की रेड में न सिर्फ बाधा डाली बल्कि अधिकारियों को डरा-धमकाकर सबूतों से छेड़छाड़ की। ममता सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि यह मामला चुनावों के बीच उठाया गया है और इससे राजनीतिक माहौल प्रभावित हो सकता है। ईडी चुनावी डेटा चुराने की कोशिश कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सवाल किया, ‘क्या लॉर्डशिप को लगता है कि हाईकोर्ट न्याय नहीं कर सकता?’ इस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा, कृपया हमारे मुंह में शब्द न डालें। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले को गंभीर करार दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह एक गंभीर मामला है। हम इस पर परीक्षण करेंगे। अदालत ने ईडी की याचिका पर नोटिस जारी करने का संकेत दिया। ममता बनर्जी की केंद्र सरकार से टकराने की फेहरिस्त काफी लंबी है।

इसका नमूना कोरोना महामारी में केंद्र के साथ टकराव, अम्फन तूफान को लेकर गृह मंत्री के साथ झगड़ा शामिल है। इस क्रम में बंगाली प्रवासी मजदूरों को लेकर केंद्र और बंगाल सरकार के बीच टकराव को कौन भूल सकता है। बंगाल की सीमा पर नेपाल, बांग्लादेश और भूटान से आने वाले ट्रकों को लेकर भी केंद्र और बंगाल सरकार के बीच टकराव हुआ था। हुगली के तेलिनीपाड़ा में हुए दंगे को लेकर सोशल मीडिया में सवाल उठाने पर बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय के खिलाफ हुई रिपोर्ट पर राज्य पुलिस ने सांसद अर्जुन सिंह और लॉकेट बनर्जी समेत कई नेताओं पर मामले दर्ज कर एक और टकराव को जन्म दिया था। टकराव की इस कड़ी में नया मामला पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति का है। राज्य के मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल इसी महीने 31 जनवरी को खत्म हो रहा है। यूपीएससी ने ममता सरकार को एक बहुत बड़ा झटका दिया। आयोग ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई आईपीएस अधिकारियों की लिस्ट को वापस लौटा दिया। यूपीएससी ने राज्य सरकार की सिफारिश को तकनीकी और कानूनी आधार पर रिजेक्ट कर दिया। दरअसल राज्य सरकार ने नए डीजीपी के चयन के लिए कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भेजे थे। लेकिन आयोग ने इस लिस्ट पर विचार करने से ही इनकार कर दिया। यूपीएससी का कहना है कि पुरानी प्रक्रियाओं में कई खामियां छोड़ी गई थीं। इसके चलते वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया को सही नहीं माना जा सकता है।

नियमों के मुताबिक सरकार को एक तय समय सीमा के भीतर यह लिस्ट भेजनी चाहिए थी। यूपीएससी ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से परमिशन लेनी चाहिए। अब यह मामला कानूनी पेचीदगियों में बुरी तरह फंसता नजर आ रहा है। सरकार के सामने अब कोर्ट जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। गौरतलब है कि पूर्व में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री आगवानी तक के लिए नहीं आई और न ही बैठक में शामिल हुई। पीएम का दौरा तूफान यास से हुए नुकसान का आकलन करना था। ओडिशा और बंगाल का दौरा तय हो जाने के बाद, दोनों मुख्यमंत्रियों को साथ ही समय बताया गया था। लेकिन ओडिशा ने उस कार्यक्रम के सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जबकि वो पीएम के बंगाल के दौरे से पहले था। ममता बनर्जी का आरोप था कि उन्हें पीएम मोदी का इंतजार करना पड़ा, जबकि पीएम को ही ममता का इंतजार करना पड़ा। पीएम के इंतजार करने की बात तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद के ट्वीट से भी पुख्ता हुई थी। ममता बनर्जी अपने हेलीकॉप्टर से उतरकर बैठक की जगह पहुंची जो कि हेलीपैड से सिर्फ 500 मीटर दूर था। पीएम से मिलकर वो 14.35 पर वापस भी चली गयीं। इसलिए वो सिर्फ 500 मीटर चलीं और 25 मिनट में वापस चली गईं। उनका पहले वापस जाना भी प्रोटोकॉल के खिलाफ था। इसलिए बंगाल सरकार का ये दावा गलत है कि ममता ने इंतजार किया बल्कि इसके उलट पीएम को ही इंतजार करना पड़ा था।

केंद्र के साथ ममता के टकराव में बड़ा पेंच शारदा चिटफंड घोटाले ने भी बढ़ाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच कर रही सीबीआई के अधिकारी तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए पश्चिम बंगाल पहुंची थी और उसे राज्य पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पहले सीबीआई अधिकारियों को पुलिस कमिश्नर के घर घुसने नहीं दिया गया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद खुद सीएम ममता बनर्जी पुलिस कमिश्नर के घर पहुंचकर धरने पर बैठ गईं। शारदा चिट फंड घोटाले की जांच का नेतृत्व कर रहे तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप था और इसी मामले में पूछताछ करने सीबीआई वहां पहुंची थी। वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और बंगाल बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय प्रदेश का दौरा कर रहे थे कि अचानक उनके काफिले पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई। बहरहाल, ममता का विरोध ज्यादातर मुद्दों पर कानूनी कम और राजनीतिक ज्यादा नजर आता है।

योगेंद्र योगी

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