नई दिल्ली: पश्चिमी देशों ने जब से रूसी तेल पर बैन लगाया है, भारत ने भी इसका आयात कम कर दिया है। भारत में रूसी तेल का आयात दिसंबर में काफी कम हो गया। यह पिछले दो सालों में सबसे निचला स्तर था। पश्चिमी देशों के बैन के कारण भारतीय रिफाइनरियों को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ा। नतीजतन OPEC देशों से तेल आयात का हिस्सा 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
भारत को रूसी तेल छूट पर मिलता था। रॉयटर्स के मुताबिक रूसी तेल के आयात में कमी आने से भारत की तेल रिफाइनरियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। अब उन्हें मध्य पूर्व, अमेरिका और दक्षिण अमेरिका जैसे देशों से तेल खरीदने पर ध्यान देना होगा।
रूसी तेल में कितनी कमी
- अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं। इससे भारत में रूसी तेल की आपूर्ति धीमी हो गई है।
- दिसंबर 2025 में रूस से तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में लगभग 22% घटकर 1.38 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया।
- इससे दिसंबर में रूस का तेल आयात में हिस्सा घटकर 27.4% हो गया जो जनवरी 2023 के बाद सबसे कम है।
जारी रहेगी खरीद
केप्लर के रिफाइनिंग और मॉडलिंग के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोला ने कहा कि जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात औसतन 1.2 मिलियन से 1.4 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने की उम्मीद है। उनका मानना है कि यह कमी केवल कुछ समय के लिए है और भारत पूरी तरह से रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। यह अनुपालन संबंधी मुद्दों के कारण एक छोटी सी रुकावट लग रही है।
OPEC का हिस्सा बढ़ा
साल 2025 के लिए भारत के कच्चे तेल आयात में OPEC का हिस्सा बढ़कर 50% से ज्यादा हो गया है। यह पिछले साल 49% था। वहीं, रूस का हिस्सा घटकर 33.3% रह गया, जबकि 2024 में यह 36% था। साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, भारत रियायती रूसी समुद्री तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था।

