अहमदाबाद : गुजरात के खेड़ा जिले में 2018 में एक घटना हुई थी। 35 साल की एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार करके उसकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। पूरे इलाके को दहला देने वाली इस घटना के आरोप में ट्रायल कोर्ट ने तीन लोगों को मौत की सजा दी थी। अब इस केस में हैरान कर देने वाली मोड़ आया है। गुजरात हाई कोर्ट ने सजा पाए तीन लोगों को बरी कर दिया है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने तीनों की तत्काल रिहाई का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति आई जे वोरा और न्यायमूर्ति आर टी वच्छानी की पीठ ने केस की सुनवाई की। बेंच ने खेड़ा में कपडवंज कस्बे के पास के गांवों के निवासी गोपी उर्फ भाला देवीपुजक, जयंती वादी और लाला वादी उर्फ कंकुडियो की सजा को पलट दिया। बेंच ने टिप्पणी की, ‘अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे अपना मामला साबित करने में सक्षम नहीं रहा है, क्योंकि आरोपियों के अपराध की ओर इशारा करने वाली सभी आपत्तिजनक परिस्थितियों की पूरी श्रृंखला न तो स्थापित हुई और न ही साबित हुई।’

ब्लड और सीमन सैंपल की रिपोर्ट पर हुई थी सजा

हालांकि फोरेंसिक विश्लेषण से पता चला कि ब्लड और सीमन के नमूने आरोपियों से मेल खाते हैं। निचली अदालत ने जो सजा सुनाई, उसका प्रमुख आधार यही था। हाई कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्टों के साक्ष्य मूल्य को अस्वीकार कर दिया क्योंकि नमूनों के संग्रह, संरक्षण और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) को भेजने की अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

गुजरात हाई कोर्ट ने क्या माना

अदालत ने कहा, ‘यह स्वीकार किया जाता है कि 14 दिनों की देरी के बाद नमूने अहमदाबाद स्थित एफएसएल को भेजे गए थे। देरी का कारण स्पष्ट नहीं है, और इस अवधि के दौरान नमूनों को किन परिस्थितियों में संरक्षित किया गया था, यह भी रिकॉर्ड में नहीं आया है।’

हाई कोर्ट जस्टिस ने जताया खेद

फोरेंसिक तकनीक में प्रगति के बावजूद बरी होने के लिए जिम्मेदार प्रक्रियात्मक खामियों पर खेद व्यक्त करते हुए, हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया। हाई कोर्ट ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी प्रगति के बावजूद, हमारे पास अभी भी ऐसे मामले हैं जहां सबूत उपलब्ध होने के बावजूद, उन्हें खारिज करना पड़ता है क्योंकि संबंधित व्यक्ति- चाहे डॉक्टर हों या जांचकर्ता, ऐसे संवेदनशील सबूतों को संभालने में लापरवाही बरतते हैं।’

क्या है पूरा मामला

अक्टूबर 2018 में पीड़िता को कथित तौर पर मोतीझर गांव से अगवा कर खेड़ा जिले के निर्मली गांव ले जाया गया। वहां उसके साथ गैंगरेप किया गया और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई। बाद में उसका शव एक खेत में पड़ा मिला, जिसके बाद पीड़िता के भाई ने एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में तीन व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया और कपडवंज की एक सत्र अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया। 29 अप्रैल 2022 को अपराध को रेयरेस्ट केस मानते हुए आरोपियों को मौत की सजा सुनाई।

हाई कोर्ट गई थी गुजरात सरकार

गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में मृत्युदंड की पुष्टि के लिए याचिका दायर की थी, क्योंकि निचली अदालत के दिए गए मृत्युदंड के लिए हाई कोर्ट की ओर से अनिवार्य पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को भी चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद, उच्च न्यायालय ने कथित अपराध से संबंधित चिकित्सा इतिहास दर्ज करने वाले डॉक्टरों के साक्ष्यों पर भरोसा करने से इनकार कर दिया, यह मानते हुए कि ऐसे साक्ष्य स्वीकार्य नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि चिकित्सा नमूने एकत्र करते समय, विशेष रूप से पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में, आरोपी के बयान दर्ज करना डॉक्टर का काम नहीं था। अदालत ने आरोपी के कथित गैर-न्यायिक इकबालिया बयान को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसने कथित तौर पर पीड़ित के भतीजे के सामने अपराध स्वीकार किया था।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
Exit mobile version