नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन सर्वोच्च आदर्श और शांति के लिए संघर्ष से भरा रहा है। यह ऐसे नौजवान युवा की कहानी है जो हर भारतीय के लिए संघर्ष और सफलता की गाथा का अनुभव कराती है। आज हम जिस युग में जी रहे हैं, उसकी कल्पना समाज के महापुरुषों के बिना अधूरी है। ऐसे महापुरुषों में नेताजी अपनी प्रतिभा से समाज को आजादी दिलवाने चाहते थे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ एक ऐसी फौज खड़ी कर दी थी जिसके मुख से एक ही नारा निकलता था जय हिंद का। और भारतीय राष्ट्रीय स्वाधीनता संघर्ष में क्रांतिकारी आंदोलन की अपनी लड़ाई की भूमिका निभाने में वह सफल रहे थे और उनकी आंखों के सामने एक ही स्वप्न था भारत को आजाद करवाना। सुभाष चंद्र बोस ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत देश में चल रहे असहयोग आंदोलन से की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता हासिल की। 20 जुलाई 1921 को उनकी मुलाकात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से हुई। लेकिन, वैचारिक समानता न होने के कारण उन्होंने देशबंधु चितरंजन दास के साथ मिलकर बंगाल आंदोलन का नेतृत्व किया। बोस क्रांतिकारी विचारों के व्यक्ति थे। उनके अंदर असीम साहस, अनूठे शौर्य और अनूठी संकल्प शक्ति का अनंत प्रवाह विद्यमान था। उन्हें वर्ष 1921 में अपने क्रांतिकारी विचारों और गतिविधियों का संचालन करने के कारण पहली बार छह माह जेल जाना पड़ा।

इसके बाद तो जेल यात्राओं, अंग्रेजी अत्याचारों और प्रताडऩाओं को झेलने का सिलसिला चल निकला। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें ग्यारह बार जेल जाना पड़ा। इसके साथ ही उन्हें अंग्रेजी सरकार द्वारा कई बार लंबे समय तक नजरबंद भी रखा गया। लेकिन बोस अपने इरादों से कभी भी टस से मस नहीं हुए। इसके लिए उन्होंने कई बार अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकी और अंग्रेजी शिकंजे से निकल भागे। 1939 में गांधी जी से मतभेद के कारण सुभाष चंद्र ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। फिर उन्होंने आजाद हिंद फौज और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। एक शोधपत्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भारत की आजादी में योगदान पर प्रकाश डाला गया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिनमें 6 बेटियां और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पांचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था। नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात उनकी शिक्षा कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई। आजादी की लड़ाई में उनके योगदान की गाथा लंबी है। बहरहाल, युवाओं के लिए वह प्रेरणा स्रोत थे।-नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन सर्वोच्च आदर्श और शांति के लिए संघर्ष से भरा रहा है। यह ऐसे नौजवान युवा की कहानी है जो हर भारतीय के लिए संघर्ष और सफलता की गाथा का अनुभव कराती है। आज हम जिस युग में जी रहे हैं, उसकी कल्पना समाज के महापुरुषों के बिना अधूरी है। ऐसे महापुरुषों में नेताजी अपनी प्रतिभा से समाज को आजादी दिलवाने चाहते थे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ एक ऐसी फौज खड़ी कर दी थी जिसके मुख से एक ही नारा निकलता था जय हिंद का। और भारतीय राष्ट्रीय स्वाधीनता संघर्ष में क्रांतिकारी आंदोलन की अपनी लड़ाई की भूमिका निभाने में वह सफल रहे थे और उनकी आंखों के सामने एक ही स्वप्न था भारत को आजाद करवाना। सुभाष चंद्र बोस ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत देश में चल रहे असहयोग आंदोलन से की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता हासिल की। 20 जुलाई 1921 को उनकी मुलाकात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से हुई। लेकिन, वैचारिक समानता न होने के कारण उन्होंने देशबंधु चितरंजन दास के साथ मिलकर बंगाल आंदोलन का नेतृत्व किया। बोस क्रांतिकारी विचारों के व्यक्ति थे। उनके अंदर असीम साहस, अनूठे शौर्य और अनूठी संकल्प शक्ति का अनंत प्रवाह विद्यमान था। उन्हें वर्ष 1921 में अपने क्रांतिकारी विचारों और गतिविधियों का संचालन करने के कारण पहली बार छह माह जेल जाना पड़ा।

इसके बाद तो जेल यात्राओं, अंग्रेजी अत्याचारों और प्रताडऩाओं को झेलने का सिलसिला चल निकला। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें ग्यारह बार जेल जाना पड़ा। इसके साथ ही उन्हें अंग्रेजी सरकार द्वारा कई बार लंबे समय तक नजरबंद भी रखा गया। लेकिन बोस अपने इरादों से कभी भी टस से मस नहीं हुए। इसके लिए उन्होंने कई बार अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकी और अंग्रेजी शिकंजे से निकल भागे। 1939 में गांधी जी से मतभेद के कारण सुभाष चंद्र ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। फिर उन्होंने आजाद हिंद फौज और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। एक शोधपत्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भारत की आजादी में योगदान पर प्रकाश डाला गया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिनमें 6 बेटियां और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पांचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था। नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात उनकी शिक्षा कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई। आजादी की लड़ाई में उनके योगदान की गाथा लंबी है। बहरहाल, युवाओं के लिए वह प्रेरणा स्रोत थे।-डा. मनोज डोगरा

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