श्रीमंत शंकर देव के विचार सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता की नींव – श्री डेका

श्रीमंत शंकर देव के लेखनी से पूरा देश गौरवान्वित हुआ है – श्री साय

रायपुर- राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल श्री रमेन डेका ने की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल जी सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर किया गया। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, सामानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं।

श्री डेका ने कहा कि इस शोध पीठ की स्थापना उत्तर पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमी एवं शोध के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रूपये दिए गए हैं जिसके लिए उन्हांेने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।

राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव ने समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीत और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक व प्रचारक के रूप में ख्याति अर्जित की है। श्रीमंत शंकर देव को उत्तर पूर्व भारत के महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठ कर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता, करूणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। श्रीमंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य अंकिया नाट और बोरगीत आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके विचारों ने असमिया समाज को एक सूत्र में पिरोया और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि पूज्य शंकरदेव जी का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके द्वारा सामाजिक जागरण का जो कार्य किया गया, उसका प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। श्रीमंत शंकर देव जी द्वारा रचित साहित्य, नाटक, भजन में भारतीय संस्कृति का उद्घोष है।. हमारा देश अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे श्री शंकरदेव जी जैसे भारत माता के सपूत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्कृति को समर्पित किया। वर्तमान और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान को बताकर हम एक सक्षम और समृद्ध भारत बना सकते हैं। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार होता है। श्री शंकर देव जी ने अपनी एक रचना में कहा कि भारत भूमि में जन्म लेना सबसे सौभाग्य की बात है। उन्होंने 500 वर्ष पहले एक भारत का जो संदेश दिया, उसे आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ का नारा देकर साकार कर रहे हैं।

मुख्य वक्ता डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा असम राज्य विविधताओं से भरा हुआ है। यहां विविध प्रकार की जनजाति भौगालिक, नदी, पहाड़, जंगल, घने वन उपस्थित है। जिस कारण यहां हजारों वर्षों से दूर दूर विविध जनजाति निवास करते है। इन जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महत्वपूर्व कार्य श्रीमंत शंकर देव ने किया। उन्होंने श्री कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया लोगो को जोड़ा। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख व्यक्तिव है उन्होंने भक्ति के साहित्य का लेखन किया, नाट्य, गायन खड़े प्रशिक्षण दिया। गांव गांव में नाम घर की स्थापना किए। आज असम के हर गांव है जिसे नाम स्थापित है। भक्ति, संस्कृति एवं सामाजिक सद्भाव का घर कहलाता है। उन्होंने श्रीमंत शंकर देव के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों की कार्यशाला बनकर उभरेगा। यहाँ से निकलने वाले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे।

कार्यक्रम के अंत में संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों और प्रबंधन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा।

गौरतलब है श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतों के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाएगा। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
Exit mobile version