नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ADNOC गैस और HPCL के बीच $3 बिलियन के LNG सप्लाई एग्रीमेंट पर साइन करके अपनी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत किया है। इस डील का उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप और कॉरपोरेशन इंस्ट्रूमेंट्स को बढ़ाना है।

भारत ने बीते 10 सालों में अपने डिफेंस सिस्टम को काफी मजबूत बनाया है। भारत में ही बड़े पैमाने पर रक्षा हथियारों का प्रोडक्शन हो रहा है। इसके साथ ही भारत दूसरे देशों को हथियार बेच भी रहा है। भारत और यूएई के बीच इस डील से आने वाले समय में इस सेक्टर में और इजाफा हो सकता है।

10 साल में 184 फीसदी बढ़ा प्रोडक्शन

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत का डिफेंस प्रोडक्शन 2015-16 में 53,000 करोड़ रुपये था, जो कि 2024-25 में 1,50,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ये आंकड़े घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के विकास और इसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी के बारे में बताते हैं। भारत में प्रोडक्शन बढ़ने के साथ ही इंडस्ट्री में इन प्रोडक्ट्स की डिमांड भी बढ़ी है।

भारत में डिफेंस प्रोडक्शन में की तरफ नजर डालें तो FY16 से FY25 तक 184 फीसदी की बढ़त हुई है। इस प्रोडक्शन के बढ़ने के साथ ही एक्सपोर्ट में भी भारी इजाफा देखने को मिला है। 2015-16 में 2,100 करोड़ रुपये से एक्सपोर्ट 2025-26 में 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो कि 1024% की बढ़त दिखाता है।

किन-किन देशों को हथियार बेचता है भारत?

SIPRI के 2000-2024 के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का एक्सपोर्ट अपने पड़ोसी देशों और हिंद महासागर क्षेत्र में केंद्रित है।

  • भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट का 31% हिस्सा म्यांमार के पास जाता है।
  • श्रीलंका में भारत 18% डिफेंस प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करता है।
  • भारत से सबसे ज्यादा डिफेंस प्रोडक्ट लेने में मॉरीशस तीसरे नंबर पर है। यहां भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट का 11% हिस्सा आता है।

देखा जाए तो कुल मिलाकर ये तीनों देश म्यांमार, श्रीलंका और मॉरीशस भारत के कुल डिफेंस एक्सपोर्ट का लगभग 60% हिस्सा हैं। अन्य देशों में सेशेल्स और आर्मेनिया शामिल हैं, जो यूरेशिया क्षेत्र में भी भारत की बढ़ती पहुंच को दिखाते हैं।

डिफेंस डील से भारत बढ़ा रहा ताकत

भारत और यूएई के बीच ये डील ऐसे समय में हुई है जब भारत दुनिया भर में अपने डिफेंस संबंधों को तेजी से बढ़ा रहा है। यूनाइटेड स्टेट्स भारत के सबसे महत्वपूर्ण डिफेंस पार्टनर्स में से एक है। भारत और अमेरिका के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सेस, सुरक्षित कम्युनिकेशन, जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज और डिफेंस टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ते सहयोग के लिए समझौते हुए हैं।

राफेल फाइटर जेट्स के लिए मशहूर फ्रांस, भारत का एक और प्रमुख सप्लायर और को-डेवलपमेंट पार्टनर है। वहीं रूस, भारत का लंबे समय से रणनीतिक सहयोगी है। रूस के साथ भारत मिसाइल, एयरक्राफ्ट, सबमरीन और ब्रह्मोस जैसे जॉइंट प्रोजेक्ट्स पर सहयोग करना जारी रखे हुए है।

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