नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच इसी महीने ट्रेड डील की घोषणा होने की उम्मीद है। लेकिन उससे पहले यूरोप ने भारत को एक झटका दिया है। ईयू ने भारत के कुछ सामान पर एक्सपोर्ट बेनिफिट्स रोक दिए हैं। इनमें कपड़े, गहने, रसायन, प्लास्टिक, धातु और ट्रांसपोर्ट के सामान शामिल हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत अंतिम चरण में है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि पुरानी व्यवस्था का ही हिस्सा है और इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को पहले टैरिफ पर करीब 20% का फायदा मिलता था लेकिन वह अब खत्म हो गया है। साथ ही 1 जनवरी से EU का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) भी लागू हो गया है। EU ने भारत के लिए जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रीफरेंसेज (GSP) के फायदे रोक दिए हैं। इसका मतलब है कि 1 जनवरी से इन भारतीय सामानों पर EU में ज्यादा टैरिफ लगेगा।

क्या है जीएसपी?

GSP एक ऐसी स्कीम है जिसके तहत विकसित देश विकासशील देशों के सामानों पर कम टैरिफ लगाते हैं ताकि उनके निर्यात को बढ़ावा मिल सके। अब इस स्कीम के तहत सिर्फ करीब 13% भारतीय निर्यात को ही फायदा मिलेगा। इसमें खेती और चमड़े के सामान शामिल हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बताया कि 2016 से EU धीरे-धीरे भारत के कई सामान पर GSP बेनिफिट्स कम करता रहा है। इस वजह से वित्त वर्ष 2025 में भारत से EU को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 47% (35.6 अरब डॉलर) हिस्सा GSP के फायदे के दायरे से बाहर हो गया है। केवल 53% निर्यात (40.2 अरब डॉलर का) ही अभी भी GSP के तहत आता है।

GSP के तहत भारत को मिलने वाले टैरिफ बेनिफिट्स साल 2016 में खनिज, रसायन, कपड़ा, धातु और ट्रांसपोर्ट के सामान के लिए रोके गए थे। 2019 में इसमें ट्रांसपोर्ट के कुछ और सामान जोड़े गए। 2023 में तो यह लिस्ट काफी बढ़ गई। इसमें रसायन, प्लास्टिक, चमड़ा, कपड़ा, पत्थर और कांच के उत्पाद, कीमती धातुएं, सामान्य धातुएं, मशीनरी, बिजली के उपकरण और रेल ट्रांसपोर्ट शामिल हो गए।

किसे होगा फायदा?

मंत्रालय ने यह भी बताया कि 1 दिसंबर, 2025 को जारी नियमों के अनुसार यही लिस्ट बढ़ाई गई है। 1 जनवरी, 2026 से 31 दिसंबर, 2028 तक इन सामानों पर GSP के तहत मिलने वाले टैरिफ बेनिफिट्स सस्पेंड रहेंगे। उदाहरण के लिए कपड़े के उत्पाद पर पहले 12% टैक्स लगता था, लेकिन GSP के तहत उसे सिर्फ 9.6% ही देना पड़ता था। अब GSP का फायदा खत्म होने से निर्यातकों को पूरा 12% ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) ड्यूटी देनी होगी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, “EU द्वारा भारतीय निर्यात के लगभग 87% पर GSP फायदे वापस लेने से औसतन 20% का टैरिफ बेनिफिट्स खत्म हो गया है। इससे ज्यादातर सामानों को EU में पूरी MFN ड्यूटी पर बेचना पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता खासकर बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले कमजोर हुई है। इन देशों को अब भी तरजीही पहुंच का फायदा मिल रहा है।”

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