नई दिल्ली- केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था। उन्हें 20 जून, 2024 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट की अवकाशकालीन न्यायाधीश नियाय बिंदु ने जमानत दे दी थी। ईडी की चुनौती पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

दिल्ली की एक अदालत ने आज पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति घोटाले से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समन का पालन न करने के मामलों में बरी कर दिया। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने फैसला सुनाया। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को जारी समन का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। ईडी ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने जांच में शामिल होने के लिए जारी किए गए समन का जानबूझकर पालन नहीं किया। ईडी ने केजरीवाल के खिलाफ समन का पालन न करने के आरोप में दो आपराधिक शिकायतें दर्ज की थीं। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 2 नवंबर और 21 दिसंबर 2023 तथा 3 जनवरी और 18 जनवरी 2024 को जारी किए गए ईडी के समन में उपस्थित नहीं हुए थे। उन्होंने इन समन नोटिसों को अवैध बताया था।

केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था। उन्हें 20 जून, 2024 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट की अवकाशकालीन न्यायाधीश नियाय बिंदु ने जमानत दे दी थी। ईडी की चुनौती पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी। जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत देते हुए ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को उच्च पीठ के पास भेज दिया। ईडी ने आरोप लगाया था कि आबकारी नीति को कुछ निजी कंपनियों को थोक व्यापार में 12 प्रतिशत का लाभ देने की साजिश के तहत लागू किया गया था, हालांकि मंत्रिपरिषद (जीओएम) की बैठकों के कार्यवृत्त में ऐसी कोई शर्त दर्ज नहीं थी। एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि विजय नायर और अन्य व्यक्तियों ने साउथ ग्रुप के साथ मिलकर थोक विक्रेताओं को असाधारण लाभ मार्जिन देने की साजिश रची थी।

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