नई दिल्ली: कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में 20 जनवरी को 25 साल के एक पीएचडी स्टूडेंट रामस्वरूप इशराम ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने उस बिल्डिंग की छठी मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगा दी थी, जिसमें वो अपने परिवार के साथ रहते थे. संस्थान के अर्थ साइंसेज विभाग में शोध छात्र इशराम राजस्थान के चुरू जिले के रहने वाले थे. एक महीने के अंदर यह आईआईटी कानपुर कैंपस छात्र की आत्महत्या का दूसरा मामला था.पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर इसे मानसिक तनाव का मामला बताया था. इससे पहले पिछले साल 29 दिसंबर को आईआईटी कानपुर में ही बीटेक फाइनल ईयर के स्टूडेंट जय सिंह मीणा ने भी आत्महत्या कर ली थी.आईआईटी जैसे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है.

आईआईटी कानपुर में छात्रों की आत्महत्या के बढते मामलों ने केंद्र सरकार चिंतित है. केंद्र सरकार ने संस्थान में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं की समीक्षा करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव देने के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी को मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण सहायता को बढ़ाने के उपाय के सुझाव देने के लिए भी कहा गया है. इस कमेटी के प्रमुख राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (एनईटीएफ) के प्रमुख अनिल सहस्त्रबुद्धे,दिल्ली के एक अस्पताल के मनोचिकित्सक जितेंद्र नागपाल और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) रीना सोनोवाल कौली को शामिल किया गया है. सरकार ने कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है. 

आईआईटी में आत्महत्या के बढ़ते मामले

अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक खबर के मुताबिक छात्रों के आत्महत्या के मामले में आईआईटी कानपुर सबसे आगे हैं. 
आईआईटी के पूर्व छात्रों के एक समूह के आंकडों के मुताबिक जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच देशभर के आईआईटी में करीब 65 छात्रों ने आत्महत्या की.इनमें से 30 मामले पिछले दो सालों में सामने आए हैं. इनमें से नौ मामले अकेले आईआईटी कानपुर में दर्ज किए गए. यह देश के कुल 23 आईआईटी में सबसे अधिक हैं. इस दौरान आईआईटी खड़गपुर में आत्महत्या की सात घटनाएं दर्ज की गई हैं. वहीं आईआईटी बाम्बे में आत्महत्या का केवल एक मामला सामने आया है. जबकि छात्रों के मामले में वह आईआईटी कानपुर से आगे हैं. वहीं आईआईटी मद्रास में पिछले दो सालों में आत्महत्या का एक भी मामला सामने नहीं आया है. 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक 2023 में भारत में छात्रों की आत्महत्या के 13 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए.आईआईटी जैसे संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर विशेषज्ञों का कहना है कि संस्थान इन मामलों को निजी या पढ़ाई-लिखाई के तनाव के तौर सामान्यीकरण कर देते हैं, जबकि असल कारण कहीं ज्यादा गहरे हैं. इन कारणों में छात्रों पर लगातार मूल्यांकन का दबाव, तगड़ा कंपटीशन, अकेलापन और कुछ मामलों में जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव भी शामिल है. विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि खतरे के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, छात्रों को संस्थागत मदद तब मिलती है, जब हालात गंभीर हो चुके होते हैं. 

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