चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का हालिया सोशल मीडिया संदेश राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस नेतृत्व की हालिया बैठक से उन्हें बाहर रखे जाने के बाद सिद्धू के इस संदेश को पार्टी के भीतर उनकी उपेक्षा और नाराज़गी से जोड़कर देखा जा रहा है। पंजाब इकाई के नेताओं के साथ हुई इस अहम बैठक में सिद्धू की गैरमौजूदगी ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक लगभग 20 सेकंड के वीडियो में सिद्धू बगीचे में शांत वातावरण के बीच चाय का कप थामे नजर आते हैं।
वीडियो में क्या
इस वीडियो में नवजोत सिंह सिद्धू का का हाव-भाव सहज और मुस्कान शांत दिखाई देती है, लेकिन उनके शब्दों में छिपा संदेश साफ संकेत देता है। वह कहते हैं, गुरु, ज़िंदगी से थोड़ी वफ़ा कीजिए, जो नहीं मिला उसे दफा कीजिए, हर कोई नहीं है आपके काबिल, अकेले बैठकर चाय का मजा लीजिए। इस कथन को कांग्रेस नेतृत्व से मिली अनदेखी के प्रति उनके असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, दो दिन पहले कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पंजाब कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की थी। इसमें राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के अलावा अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे। बैठक में पंजाब की राजनीतिक स्थिति, दलित मुद्दों और पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी पर चर्चा हुई, खासकर 2027 विधानसभा चुनावों को देखते हुए। हालांकि, इस बैठक में नवजोत सिद्धू को आमंत्रित नहीं किया गया।
पत्नी ने की थी नितिन गडकरी और अमित शाह की तारीफ
सिद्धू के करीबी लोगों का कहना है कि वह कांग्रेस नेतृत्व की ओर से संपर्क की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन निमंत्रण न मिलने से वे आहत हुए। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने समर्थकों से फोन पर लंबी बातचीत की और अंततः सार्वजनिक रूप से अपनी नाराज़गी जाहिर करने का रास्ता चुना। इस बीच, सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर द्वारा बीजेपी नेताओं के साथ बढ़ती नजदीकियों ने राजनीतिक अटकलों को और मजबूत किया है। वह पहले ही कांग्रेस से निलंबित हैं और हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति सार्वजनिक रूप से प्रशंसा जता चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, सिद्धू दंपति के बीजेपी में वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर इसलिए क्योंकि दोनों ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजेपी से ही की थी।

