अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान हादसा और बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान का क्रैश होना – ये दो बिल्कुल अलग घटनाएं दिख सकती हैं, लेकिन दोनों ने ही देश को स्तब्ध कर दिया है और दोनों कई सवाल छोड़ गई है। अहमदाबाद केस की जांच अब भी जारी है और हर कुछ दिन ऐसी बातें सामने आती हैं, जिनसे मदद के बजाय उलझन ज्यादा होती है। वहीं, बारामती हादसा शुरू से कई गंभीर कमियों की ओर इशारा कर रहा है।
विजिबिलिटी की कमी। DGCA की ओर से दी शुरुआती जानकारी से साफ है कि विमान के पायलट को रनवे नहीं दिख रहा था। पहली बार लैंडिंग की कोशिश नाकाम हुई, तो विमान ने हवा में फिर से चक्कर लगाया। दूसरी बार भी शुरुआत में रनवे नहीं दिख रहा था, लेकिन कुछ देर बाद कहा गया कि रनवे दिखने लगा है। इसके कुछ क्षणों बाद ही भयानक हादसा हो गया।
खतरनाक स्थितियां। DGCA के मुताबिक, क्रू ने मेडे कॉल नहीं दी। विमानन क्षेत्र में मेडे वह चेतावनी है, जो अति गंभीर स्थिति में जारी की जाती है। अगर आखिरी वक्त में हालात पूरी तरह से नियंत्रण में नहीं थे तो मेडे कॉल क्यों नहीं दी गई? दूसरी चिंता फ्लाइंग कंडीशन को लेकर है। बारामती में ट्रैफिक सर्विस और सूचनाएं एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया नहीं, फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशंस की तरफ से उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे एयरफील्ड को अन कंट्रोल्ड कहते हैं और आमतौर पर यहां सुविधाएं कम होती हैं। तो जब विजिबिलिटी का संकट था और दो बार रनवे नहीं दिखा, क्या लैंडिंग के जोखिम को नजरअंदाज किया गया?
अधूरी जांच। अजित पवार जिस विमान में सवार थे, वह VSR Ventures का है। सितंबर 2023 में इसी कंपनी का एक विमान मुंबई एयरपोर्ट पर हादसे का शिकार हो गया था। तब गनीमत रही कि उसमें किसी की जान नहीं गई। हालांकि उस दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई, जबकि ज्यादातर कार्रवाई पूरी की जा चुकी चुकी है। ऐसे मामलों में देरी का मतलब है किसी और दुर्घटना को रोकने के लिए मिलने वाले समय को गंवा देना।
हर हादसा सबक। कंपनी के दोनों विमान अलग हैं और एक हादसे को दूसरे से नहीं जोड़ा जा सकता। यहां मकसद किसी पर दोष डालना भी नहीं। लेकिन, इस क्षेत्र में हर हादसा एक सबक होता है, जिससे सीख लेकर आगे कई हादसों को टाला जा सकता है। जब राजनीतिक तौर पर इतनी बड़ी क्षति हुई है, 5 जानें गई हैं, तब यह कहने भर से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती कि सेफ्टी जांच में सब सही मिला था।

