नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी नीचे आ गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशक इस सप्ताहांत आने वाले केंद्रीय बजट का इंतजार कर रहे थे और थोड़ा सतर्क हो गए थे।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में करीब 625 अंकों की गिरावट आई, जो 0.75% थी। यह दिन के कारोबार में 81,941.03 के निचले स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 50 भी लगभग उसी तरह गिरा। यह 194 अंक यानी 0.75% नीचे आकर 25,224.35 पर आ गया। यह 25,300 के स्तर से काफी नीचे चला गया। इस बिकवाली के कारण, शुरुआती कारोबार के सिर्फ 15 मिनट में निवेशकों की करीब 4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई। बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 455.73 लाख करोड़ रुपये रह गया।

मार्केट में गिरावट के 5 कारण

1. बजट की चिंताएं हावी रहीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इस बार बजट के लिए एक खास ट्रेडिंग सत्र भी रखा गया है। इस वजह से, निवेशक थोड़ा किनारे खड़े होकर बाजार को देख रहे थे। बजट को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भारत के आर्थिक विकास और कंपनियों की कमाई की दिशा जानने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि जैसे-जैसे बजट का दिन नजदीक आ रहा है, बाजार के लिए कुछ मुश्किलें और कुछ अच्छी बातें हैं।

2. रुपये का कमजोर होना
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना रहा। विदेशी मुद्रा बाजार में लगातार तनाव दिख रहा था, भले ही दिन के कारोबार में इसमें थोड़ी रिकवरी आई हो। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 7 पैसे बढ़कर 91.92 पर आ गया, जबकि पिछले सत्र में यह रिकॉर्ड 91.9850 के निचले स्तर पर चला गया था। रुपये में गिरावट के कारण पूंजी के बाहर जाने और आयातित महंगाई के जोखिमों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस कारण भी मार्केट में गिरावट देखी गई।

3. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की परेशानी को और बढ़ा दिया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंकाओं के कारण तेल की कीमतें पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इससे वैश्विक आपूर्ति बाधित होने का डर है। भारत जैसे शुद्ध तेल आयातक देशों के लिए ऊंची तेल कीमतें एक स्पष्ट नकारात्मक बात है। इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और कंपनियों की उत्पादन लागत को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।

4. वैश्विक जोखिम से बचने का माहौल हावी
वैश्विक स्तर पर एक सतर्क माहौल ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति को और कम कर दिया। शुक्रवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार को बंद होने से बचाने के लिए एक द्विदलीय समझौते का समर्थन किया और कहा कि उन्होंने फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) का नेतृत्व करने के लिए अपने उम्मीदवार का फैसला कर लिया है। इससे वैश्विक बाजारों में नई अनिश्चितता आ गई।

5. तकनीकी संकेत
तकनीकी संकेत भी नजदीकी अवधि में कमजोरी का संकेत दे रहे थे, जिससे शेयर बाजार में सतर्कता का माहौल और बढ़ गया। हालांकि हालिया उछाल ने निफ्टी को प्रमुख समर्थन स्तरों से उबरने में मदद की है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि नए उत्प्रेरकों (triggers) की अनुपस्थिति में उच्च स्तर पर बने रहने की सूचकांक की क्षमता अनिश्चित है।

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