Sankashti Chaturthi 2026: प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है. फाल्गुन मास में पड़ने वाली चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. वर्ष 2026 में यह व्रत 5 फरवरी को रखा जाएगा. इस दिन भगवान गणेश के ‘द्विजप्रिय’ स्वरूप की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से भक्तों के मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं तथा अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:22 AM से 06:15 AM तक
- शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 07:07 AM से 08:29 AM तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 PM से 12:57 PM तक
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12:35 PM से 01:57 PM तक
पूजा विधि
- पूजा वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- पूजा स्थल पर बैठकर हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें.
- एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.
- गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा, अक्षत, फूल तथा धूप-दीप अर्पित करें.
- गणपति बप्पा को उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं.
- इसके बाद द्विजप्रिय व्रत कथा का पाठ करें और अंत में गणेश जी की आरती करें.
- रात्रि में चंद्रोदय के समय चांदी के पात्र में जल, दूध और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें.
मंत्र
- मूल मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः
- द्विजप्रिय स्वरूप मंत्र: ॐ द्विजप्रियाय नमः
- बाधा मुक्ति मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
संकष्टी का अर्थ होता है संकट और कष्टों का नाश करने वाला. धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करता है, उसके जीवन से सभी कष्ट, दुख-दर्द और बाधाएं दूर हो जाती हैं. साथ ही जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है.
(अस्वीकरण;यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

