जैसलमेर। राजस्थान के जैसलमेर जिले में जासूसी के शक में पकड़े गए ई-मित्र संचालक का वॉट्सऐप अकाउंट पाकिस्तानी हैंडलर्स चला रहे थे। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपनी सिम पर आए ओटीपी को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलर्स के साथ साझा किया, ताकि उसके मोबाइल से वॉट्सऐप अकाउंट को पाकिस्तान से ऑपरेट किया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इसी वॉट्सऐप अकाउंट के जरिए आरोपी ने कई संवेदनशील और खुफिया जानकारियां पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचाई थी। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से आईएसआई के संपर्क में था।
6 दिन तक चली पूछताछ के बाद गिरफ्तारी
गौरतलब है कि जैसलमेर जिले के नेवार निवासी अमराराम पुत्र भानाराम को खुफिया एजेंसियों ने 25 जनवरी को हिरासत में लिया था और जयपुर लेकर आई थी। यहां ई-मित्र संचालक से 6 दिन तक लंबी पूछताछ हुई। खुफिया एजेंसियों को अमराराम से पूछताछ व उसके मोबाइल फोन की जांच में देश-विरोधी गतिविधियों के पुख्ता सबूत मिले। इसके बाद राजस्थान इंटेलिजेंस ने शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया।
हनीट्रैप के जाल में फंसाया
आरोपी अमराराम को पाकिस्तानी हैंडलर्स ने हनीट्रैप के जाल में फंसाया था। उसे पैसों का लालच भी दिया गया था। आरोपी ने मोटी रकम के चक्कर में भारतीय सेना की मूवमेंट और अन्य गुप्त सुचनाएं पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजी थी।

