Vastu Tips: घर का मंदिर सकारात्मक ऊर्जा और शांति का केंद्र होता है. आमतौर पर हर व्यक्ति अपने घर के मंदिर को बहुत ही खूबसूरती से सजाता है और वहां भगवान की मूर्तियां व तस्वीरें स्थापित करता है. मान्यता है कि घर में भगवान की प्रतिमा की मात्र उपस्थिति से ही बुरी शक्तियों और नकारात्मकता का नाश होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार मूर्तियों को रखने के कुछ कड़े नियम होते हैं? अनजाने में मूर्ति स्थापना के समय की गई छोटी-सी गलती घर की सुख-शांति में बाधा डाल सकती है. आइए जानते हैं कि मंदिर में मूर्ति रखते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
मूर्तियों को किस दिशा में रखें
वास्तु शास्त्र में भगवान की मूर्तियों को स्थापित करने के लिए सबसे शुभ दिशा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व (North-East) मानी गई है. इस दिशा में पूजा करने पर आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहता है. उत्तर-पूर्व दिशा को देवी-देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन की दिशा माना जाता है. इससे घर और परिवार पर भगवान की कृपा बनी रहती है.
एक ही भगवान की दो मूर्तियां न रखें
कई लोग अपने घर के मंदिर में एक ही भगवान की दो या उससे अधिक मूर्तियां रख लेते हैं. वास्तु के अनुसार एक ही देवी-देवता की दो मूर्तियां आमने-सामने या पास-पास नहीं रखनी चाहिए. इससे घर के सदस्यों में मानसिक तनाव और कलह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
खंडित मूर्ति को तुरंत हटाएं
मंदिर में कभी भी ऐसी मूर्ति न रखें जो टूटी, चटकी हुई हो या जिसका रंग पूरी तरह उतर गया हो. खंडित मूर्ति की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पूजा का फल नहीं मिलता. ऐसी मूर्तियों को किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए या किसी पवित्र पेड़ के नीचे रख देना चाहिए.
रौद्र रूप वाली तस्वीरें घर में न लगाएं
घर में हमेशा भगवान के सौम्य और आशीर्वाद देने वाले स्वरूप की ही मूर्ति या तस्वीर लगानी चाहिए. भगवान शिव का तांडव रूप, मां काली का रौद्र स्वरूप या युद्ध करते हुए देवी-देवताओं की तस्वीरें घर के मंदिर में नहीं रखनी चाहिए. इससे घर में झगड़े और अशांति बढ़ सकती है.
घर के इन स्थानों के पास न बनवाएं मंदिर
वास्तु के अनुसार घर में मंदिर कभी भी सीढ़ियों के नीचे, टॉयलेट के पास या बेडरूम के आसपास नहीं बनवाना चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है.

