भ्रष्टाचार रोकने के सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद देश में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता ही जा रहा है जिसमें कई छोटे-बड़े कर्मचारी और अधिकारी शामिल पाए जा रहे हैं। यह महारोग कितना गंभीर रूप धारण कर चुका है, यह मात्र लगभग एक महीने के निम्न समाचारों से स्पष्ट है :
* 5 जनवरी को ‘बीकानेर’ (राजस्थान) में बिजली विभाग के एक कर्मचारी ‘विनोद पुनियां’ को एक किसान से बिजली चोरी के बिल और जुर्माने की सैटलमैंट के बदले में 1.45 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। 
* 13 जनवरी को ‘गाजियाबाद’ (उत्तर प्रदेश) जिले की ‘साहिबाबाद चौकी’ में तैनात दारोगा ‘भुवनेश्वरी सिंह’ को भ्रष्टïाचार निरोधक टीम ने दहेज के एक मामले की जांच के सिलसिले में मुकद्दमे से आरोपी का नाम हटाने के बदले 45,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। 
* 20 जनवरी को ‘लुधियाना’ (पंजाब) स्थित नगर निगम कार्यालय में चल रहे ‘कैश फार जॉब’ घोटाले में विजीलैंस ब्यूरो द्वारा निगम में नम्बरदार के रूप में कार्यरत ‘बहादुर सिंह’ को एक शिकायतकत्र्ता को नौकरी दिलाने का झांसा देकर डेढ़ लाख रुपए लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 

* 21 जनवरी को पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने जिला ‘फिरोजपुर’ के थाना ‘लक्खो के बहराम’ में तैनात हैड कांस्टेबल ‘हरपाल सिंह’ को शिकायतकत्र्ता से 10,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 
* 25 जनवरी को पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर सी.आई.ए. ‘खन्ना’ में तैनात हैड कांस्टेबल ‘रमेश कुमार’ को शिकायतकत्र्ता से 5.20 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 
* 27 जनवरी को वन रेंज कार्यालय, ‘नकोदर’ (पंजाब) में तैनात गार्ड ‘कुलदीप सिंह’ और दिहाड़ीदार ‘दर्शन सिंह’ को शिकायतकत्र्ता से 20,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 
* 28 जनवरी को ‘वाराणसी’ (उत्तर प्रदेश) में दहेज उत्पीडऩ सहित अन्य धाराओं में दर्ज एफ.आई.आर. से नाम हटाने के बदले में 20,000 रुपए रिश्वत मांगने के आरोप में ‘विद्यापीठ चौकी’ के प्रभारी ‘शिवाकर मिश्रा’ और सिपाही ‘गौरव द्विवेदी’ को गिरफ्तार किया गया। 
* 28 जनवरी को ही ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) में एंटी क्रप्शन टीम ने चकबंदी विभाग के पेशकार ‘राजीव कुमार’ को शिकायतकत्र्ता की प्रापर्टी के इंद्राज संबंधी कोई गलती ठीक करने के बदले में 5000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 
* 29 जनवरी को ‘डूंगरपुर’ (राजस्थान) में भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो ने ‘दोवड़ा’ पुलिस थाने के हैडकांस्टेबल ‘अशोक कुमार पाटीदार’ और कांस्टेबल  ‘प्रकाश चंद्र पटेल’ को 1.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।  आरोपियों ने ‘लॉकेट ऐप’ के जरिए ठगी के मामलों में एफ.आई.आर. न करने के बदले में यह रकम ली थी। 

*  30 जनवरी को ‘सिधवां बेट’ (लुधियाना, पंजाब) स्थित सरकारी अस्पताल में तैनात एस.एम.ओ. ‘डा. हरकीरत सिंह’ व सहायक क्लर्क ‘सतविंदर सिंह’ को 32,000 रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
* और अब 30 जनवरी को ही ‘बेंगलुरू ’ (कर्नाटक) के ‘अग्रहारा’ पुलिस थाने में तैनात  ‘गोविंदराजू’ नामक एक पुलिस इंस्पैक्टर को धोखाधड़ी के मामले में नामजद एक आरोपी से 4 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार किया।
उक्त उदाहरणों से स्पष्टï है कि पद का दुरुपयोग कर सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों का एक वर्ग अनुचित तरीकों से अवैध सम्पत्ति जुटा रहा है। लिहाजा इस बुराई पर रोक लगाने के लिए दोषियों के प्रति कोई नर्मी न दिखाने, अधिक कठोरता बरतने और दोषी अधिकारियों को निलंबित करने की बजाय नौकरी से निकालने जैसे कानून बनाने की आवश्यकता है जिससे दूसरों को भी इससे नसीहत तथा आम जनता को राहत मिले।

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